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क्या आपको पता है काशी की इस उपलब्धि के बारे में? UNESCO में मिला है ये विशेष स्थान

 Anurag Tiwari |  2017-02-07 08:46:13.0

क्या आपको पता है काशी की इस उपलब्धि के बारे में? UNESCO में मिला है ये विशेष स्थान

तहलका न्यूज ब्यूरो

वाराणसी. काशी एक ऐसा नगर है जिसका न तो आदि है न अंत. यह शहर उतना ही पुराना माना जाता है जितनी कि भारतीय संस्कृति. बहुत कम लोग इस शहर की एक और उपलब्धि के बारे में जानते हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की राजदूत रुचिरा कम्बोज ने इस उपलब्धि के बारे में ट्वीट कर अपनी यादें ताजा की.

दरअसल यूनेस्को (यूनाइटेड नेशंस एजूकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गनाइजेशन) ने वाराणसी को वैश्विक धरोहरों की अपनी लिस्ट में क्रिएटिव सीटीज के सेक्शन में बतौर सिटी ऑफ़ म्यूजिक शामिल किया है. बाकायदा इसके लिए यूनेस्को की वेबसाइट पर वाराणसी की उपलब्धियों के के लिए एक पेज क्रिएट किया गया है. इस पेज को देखने के लिए इस लिंक पर जाएं

City of Music- Varanasi.

वाराणसी शहर की इस उपलब्धि को याद करते हुए शनिवार देर शाम यूनेस्को में भारत की राजदूत रुचिरा कांबोज ने ट्वीट कर वाराणसी को मिली इस उपलब्धि को याद किया.

City of Music- Varanasi



सिटी ऑफ़ म्यूजिक सेक्शन में वाराणसी पेज पर काशी की परंपराओं को शामिल करते हुए सुबह-ए-बनारस के आयोजन मंच और काशी की संगीत की प्राचीन परंपराओं को शामिल किया गया है और इनकी सराहना की गई है. यूनेस्को के इस स्पेशल पेज में चार अलग-अलग प्वाइंट्स पर क्रिएटिव सिटी ऑफ म्यूजिक वाराणसी के लिए एक परिकल्पना पेश की गई है.


यह चार बिंदु इस प्रकार हैं
-संगीत विद्यालय, संगीत संस्कृति, गुरु शिष्य परंपरा और संगीत ज्ञान.
-गुलाब बाड़ी, बुढ़वा मंगल, रामलीला को 350 वर्ष से संरक्षण.
-संगीत की जुगलबंदी सहित संगीत संवादों की सफलता.
-छात्रों में संगीत योजनाओं और ज्ञान अभिवृद्धि का प्रसार.


इस पेज पर वाराणसी के को लेकर एक लेख भी प्रकाशित है. इसमें काशी के पर्व, त्यौहारों की भी सराहना की गई है. इस पेज पर ही काशी में संगीत की समृद्ध गुरु-शिष्य परंपरा के प्रतीक सुप्रसिद्ध ध्रुपद गायक प्रो.ऋत्विक सान्याल की तस्वीर और अस्सी घाट पर होने वाले सुबह-ए-बनारस के मंच की तस्वीर भी पब्लिश की गई है.


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