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काशी में मिली सदियों पुरानी पाण्डुलिपि, मंत्रो से होता था इलाज

 Anurag Tiwari |  2017-01-14 09:49:09.0

काशी में मिली सदियों पुरानी पाण्डुलिपि, मंत्रो से होता था इलाज


तहलका न्यूज ब्यूरो

वाराणसी.
मेडिकल साइंस का शिव की नगरी काशी से प्राचीन रिश्ता है. शल्य चिकित्सा के पितामह कहे जाने वाले सुश्रुत का जन्म भी यहीं हुआ था. हाल ही में काशी में ही एक ऐसी पाण्डुलिपि मिली है, जिससे पता चलता है कि गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज मंत्रों द्वारा किया जाता था.




यह 250 वर्ष पुरानी पाण्डुलिपि बीएचयू न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ वीएन मिश्रा ने ढूंढ निकाली है. डॉ मिश्रा के अनुसार इस पाण्डुलिपि को उन्होंने कबाड़ से ढूंढा है. उनके मुताबिक़ उनके घर में रखी गोस्वामी तुलसीदास की 400 साल पुरानी पुरानी पाण्डुलिपि एक दिन गायब मिली. उसकी तलाश में उन्होंने शहर के कबाड़ की दुकानों को तलाश करना शुरू कर दिया. इसी दौरान एक कबाड़ी के पास उन्हें यह पाण्डुलिपि नजर आई, इसका नाम पंचरतन है. उन्होंने जब इसमें लिखे संस्कृत में लिखे मन्त्रों को पढ़ा तो उनकी दिलचस्पी बढ़ गई और उन्होंने इस पाण्डुलिपि पर रिसर्च करना शुरू कर दिया.



इस रिसर्च में उनके डिपार्टमेंट के सहयोगी भी शामिल हुए. डॉ मिश्रा की टीम ने पाया कि इस पंचरतन में लिखे मंत्र रोगों को ठीक करने के उद्देश्य से लिखे गए थे. डॉ मिश्रा और उनकी टीम ने पाया कि इस पाण्डुलिपि में लिखे मन्त्रों से उस समय मिर्गी, पागलपन, बच्चों के मियादी बुखार, अंडकोष बढ़ने (हाइड्रोसिल) जैसी बीमारियों का इलाज किया जाता था. डॉ मिश्रा ने बताया कि इस पांडुलिपि में इलाज के लिए मन्त्रों को संस्कृत के श्लोकों की तरह लिखा गया है.

डॉ मिश्रा कहते हैं कि आज मेडिकल साइंस भले तरक्की कर गया हो और इस पांडुलिपि को अंधविश्वास माने, लेकिन हकीकत यह है कि ये महज अन्धविश्वास नहीं है बल्कि इसमें मंत्रों के रूप में कई गंभीर बीमारियों के इलाज लिखे हुए हैं और यह उस समय के इलाज करने का तरीका है.


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