सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर बांटा गया यश भारती सम्मान

 2016-03-21 13:30:21.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ, 21 मार्च. सोमवार को लखनऊ में यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने 46 विभूतियों को यश भारती सम्मान दिया। इस सम्मान को बांटने के लिए यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने से भी परहेज नहीं किया। शायद इसलिए कि, यूपी विधानसभा चुनाव अगले साल है और प्रचार-प्रसार में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। यश भारती सम्मान देने के लिए एक सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा सभी अखबारों में विज्ञापन जारी किया गया। खास बात यह है कि विज्ञापन में प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव की तस्वीर के ऊपर और बड़ी तस्वीर मुलायम सिंह यादव की लगाई गई है।


खुले तौर पर की सुप्रीम कोर्ट की अवमानना!
आपको याद दिला दें कि 13 मई 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित किया था कि सरकारी विज्ञापनों में केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश की तस्वीर का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। हाल ही में 18 मार्च 2016 को उस आदेश में आंशिक संशोधन किया गया और राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल की तस्वीर लगाने की भी अनुमति दे दी। लेकिन, मुलायम सिंह यादव (तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री) इस वक्त न तो प्रदेश के मुखिया हैं और न ही राज्यपाल, तो सवाल उठता है कि उनकी तस्वीर क्यों? क्या यह खुले तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं है??? क्या ये कानून से भी बड़े हैं???

कार्यक्रम स्थल पर भी मुलायम का महिमा मंडन!

यह आयोजन पूरी तरह सरकारी कार्यक्रम था मगर फिर भी इसमें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया। कार्यक्रम स्थल पर स्टेज के पीछे लगे बैनर में भी न केवल मुलायम की तस्वीर काफी बड़ी थी बल्कि उसे फोकस लाइट द्वारा हाईलाइट भी किया गया। जबकि मुलायम किसी भी तरह सरकार में शामिल नहीं है, हां यह जरूर है कि प्रदेश में उनके पार्टी की सरकार है। इसके अलावा उन्होंने कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को संबोधित भी किया। जिसमें उन्होंने सरकार के कामों और आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

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