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आवाज़ के पैगम्बर हैं यज्ञदेव पंडित

 Sabahat Vijeta |  2016-11-19 15:44:04.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल 2016 में आज हिन्दी वांग्मय निधि की ‘हमारा लखनऊ पुस्तकमाला’ श्रंखला के तहत लखनऊ का आकाशवाणी का लोकार्पण किया गया. वरिष्ठ साहित्यकार नवीन जोशी, आकाशवाणी के लब्ध प्रतिष्ठित हस्ताक्षर यज्ञदेव पण्डित, बेगम अख्तर की शिष्या सुनीता झिंगरन, हिन्दी वांग्मय निधि के अध्यक्ष प्रो. शैलेन्द्र नाथ कपूर और राम किशोर बाजपेयी ने इसका लोकार्पण किया. इस पुस्तक को आकाशवाणी के मशहूर समाचार वाचक नवनीत मिश्र ने लिखा है.


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नवनीत मिश्र ने अपने उद्बोधन में यज्ञदेव पंडित को आवाज़ का पैगम्बर बताया. उन्होंने कहा कि उन्होंने 1965 में रामपुर रेडियो स्टेशन में आकाशवाणी की नौकरी शुरू की थी. पहले दिन ही सिग्नेचर ट्यून बजाई फिर उसे बंद करना भूल गए. उनके सीनियर रज्जन लाल ने बताया तो मैं बोला कि अरे मैं भूल गया. यह बात भी आकाशवाणी से प्रसारित हो गई. आकाशवाणी लखनऊ का शानदार इतिहास बताते हुए उन्होंने कहा कि यह केन्द्र बेग़म अख़्तर, बिस्मिल्लाह ख़ाँ, अल्ला रक्खा, शिव कुमार शर्मा, पंडित हरी प्रसाद चौरसिया और कुमार गन्धर्व जैसे महान कलाकारों की मेहनत से सजा संवरा है.


गायिका सुनीता झिंगरन ने सुर साम्राज्ञी बेगम अख्तर के बारे में अंतरंग किस्से सुनाये. उन्होंने बोलन लागी कोयलिया, मन मोरा झूलन लागा गाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया. यज्ञ देव पंडित ने बताया कि मेरे ज़माने में बहुत अच्छा काम करने वाले आर्टिस्ट को 10 रुपये की वेतन वृद्धि मिलती थी.

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