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जानें भारत में कैशलेस सोसायटी के खतरें

 Vikas Tiwari |  2016-11-27 14:57:52.0

cashless society

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में कैशलेस सोसायटी के लिए लोगों को प्रेरित किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया जब कैशलैश ईकोनॉमी की ओर बढ़ तब हमें इसमें पीछे नहीं रहना चाहिए.

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि कैशलेस सोसायटी से भ्रष्टाचार घटेगा और अर्थव्यवस्‍था में भी मजबूती आएगी. इतना ही नहीं पीएम ने लोगों से अपील कि है कि अपने मोबाइल फोन को ई वॉलेट की तरह इस्तेमाल करना चाहिए जिससे वह अपनी जरूरत के तमाम लेनदेन कर सकें. लेकिन भारत जैसे देश जहाँ सवा अरब लोगों का 80 फीसदी बाजार नकद लेनदेन करती है.


भारत में कैशलैस सोसायटी के लिए निम्न चुनौतियों है :-

  • कैशलेस सोसायटी के लिए सबसे मंत्वपूर्ण मोबाइल है. ट्राई के अनुसार में देश में 70 करोड़ के करीब लोगों के पास मोबाइल कनेक्‍शन है. लेकिन उसमें से लगभग 20 करोड़ लोगों के पास ही स्मार्टफोन है. ऐसी स्थिति में बाकि लोगों का क्या?




  • कैशलेस सोसायटी में इंटरनेट शरीर में प्राण जैसा है और भारत भारत इंटरनेट स्पीड़ के मामले में दुनिया में 114 वे नंबर पर है. भारत की औसत इंटरनेट कनेक्‍शन स्‍पीड 2.8 एमबीपीएस है, जबकि जापान जेसे देशों में यह 17.4 एमबीपीएस है. ऐसे में कैशलैस सोसायटी कैसे?




  • भारत में साक्षरता दर 75.06 है, यानि एक चौथाई आबादी आज भी अनपढ़ है. भारत के पढ़ें-लिखें लोगों में भी टेक्नोलॉजी से ज्यादा जुड़े हुए नहीं है.
    ऐसे में कैशलेस सोसायटी की परिकल्‍पना कहां तक संभव है?




  • कैशलेस सोसायटी की एक बड़ी समस्या ये भी है कि इसमें हमेशा ताकतवर बैकों और वित्तीय संस्‍थानों की मनमानी का डर बना रहेगा.




  • एनसीआरबी के आंकडों के अनुसार पिछले दस सालों में साइबर क्राइम में 14 गुणा बढोत्तरी हुई है जिसका शिकार पढ़े लिखे और अनपढ़ दोनों लोग हुए हैं. ऐसे में कैशलेस सोसायटी में क्या होगा ये प्रशन भी है ?




  • दिल्‍ली एनसीआर में नोट बंदी के बाद दस दिन के भीतर ही पांच हजार से ज्यादा उद्योगों में फिलहाल अस्‍थायी तौर पर बंद हो गए है. कैशलेस सोसायटी का सबसे बड़ा नुकसान छोटे और मझोले उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा जिनकी पूरी अर्थव्यवस्‍था नकद आधारित लेनदेन पर होती है.



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