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जन्माष्टमी पर ऐसे करें श्री कृष्‍ण की पूजा, दूर होंगे सारे कष्‍ट

 Girish Tiwari |  2016-08-25 05:23:29.0

Janamashtmi3


तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ: 
देशभर में आज श्री कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का पर्व खुशी और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण श्री विष्णु के आठवें अवतार हैं। यह भगवान श्रीकृष्ण का 5243 वां जन्मोत्सव है। जन्माष्टमी पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त 12 बजे से लेकर 12:45 तक है। यूं तो पारण का समय 26 तारीख को सुबह 10 बजकर 52 मिनट है, लेकिन जो लोग पारण को नहीं मानते वो भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद और उनकी पूजा करने के बाद यानी कि 25 अगस्त को ही रात 12:45 बजे के बाद अपना व्रत तोड़ सकते हैं।


इस दिन भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी अथवा जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। जनमाष्टमी का व्रत महाव्रत माना जाता है। देशभर में पुरूष, महिलाएं और बच्चे जन्माष्टमी का व्रत  करते हैं और ये परम्परा सदियों से हमारे देश में चली आ रही है।


जन्म अष्टमी के दिन सायं काल तुलसी पौधे के नीचे घी का दीपक जलाकर निम्न मन्त्र ऊं वासुदेवाय नमः की 2 माला का जाप करें। इस उपाय को करने से श्री कृष्ण की असीम कृपा बनी रहती है और घर में सुख व समृद्धि बनी रहती है। जन्म अष्टमी की रात्रि 12 बजे श्री कृष्ण का दूध से अभिषेक करने से घर में धन वैभव बना रहता है। आज के दिन पीला अनाज दान करने से पूरे वर्ष मॉ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।


जन्म अष्टमी के दिन 'क्लीं कृष्णाय वासुदेवाय हरि परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः' इस मन्त्र का किसी मन्दिर में तुलसी की माला से जाप करने से घर में हर प्रकार सुख व शान्ति बनी रहेगी। दक्षिणावर्ती शंख से श्री कृष्ण जी का अभिषेक करने से घर में रोग का नाश होता है तथा लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है। जिन जातकों के जीवन में लगातार समस्यायें आ रही है। वह लोग निम्न मन्त्र 'कृष्णः शरणं मम्' का जाप करें।


घर में आये दिन कोई बीमार रहता है या फिर अशान्ति का माहौल बना रहता है तो आप निम्न 'क्लीं ऋषिकेशाय नमः' की कम से कम 108 माला का जाप श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर करने पर लाभ होगा। महिलायें अपनी सौभाग्य वृद्धि के लिए निम्न 'ऊं ऐं श्रीं क्लीं प्राणवल्लभाय सौः सौभाग्यदाय श्रीकृष्णाय स्वाहा' की कम से 51 माला का जाप करें।


जिन लोगों को सन्तान प्राप्ति नहीं हो रही है। वह लोग जन्माष्टमी के दिन मन्त्र 'ऊॅ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।छेहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।। की कम से कम 108 माला का जाप करके लडडू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें।


कृष्ण जन्माष्टमी पर कैसे करें पूजन


- व्रत की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें
- सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें.
- व्रत के दिन सुबह स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं.
- इसके बाद जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें
- ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥

- अब शाम के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए 'सूतिकागृह' नियत करें.
- इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
- मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अगर ऐसा चित्र मिल जाए तो बेहतर रहता है
- इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें. पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः लेना चाहिए


- फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें-
'प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः। वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः। सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।'


- अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें

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