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अलविदाई मजालिस के साथ सवा दो महीने का मुहर्रम खत्म

 Vikas Tiwari |  2016-12-09 17:31:08.0

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लखनऊ. अय्यामे अज़ा के आखि़री दिन अंजुमन काज़मिया आबिदया के तत्वावधान में दो माह आठ दिन के अज़ादारी के समापन पर ‘‘अय्यामे अज़ा की आखि़री रातें‘‘ के शीर्षक से रौज़ा-ए-काजमैन में मजलिस-मातम का आयोजन किया गया.


आज सुबह की नमाज़ के बाद विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित नाजिम साहब के इमामबाड़े से चुप ताजिये का जुलूस निकाला गया. यह जुलूस सुबह 10 बजे रौज़ा-ए-काजमैन पहुंचा. जुलूस पहुँचने के बाद मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अशफाक ने मजलिस को खिताब किया.


इस मौके़ पर इमाम हसन अस्करी (अ.स.) की शहादत की पूर्व संध्या पर भी मजलिसों व मातम का आयोजन किया गया. इस मौके पर पहली मजलिस को मौलाना अब्बास मेंहदी इफ़तेख़ारी ने खिताब किया और इसकी अंतिम मजलिस को मौलाना कर्रार हैदर मौलाई मुज़फ़्फ़र नगर ने खिताब किया.


मजलिस के बाद छोटे नवाब द्वारा आग पर मातम कराया गया. इसके अलावा दूसरे शहरों से आयी अंजुमनों ने काजमैन परिसर में नौहाख्वानी व सीनाज़नी की.


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आठवीं रबीउलअव्वल को इमामे हसन अस्करी अ.स. शहादत बड़ी अकीदत के साथ मनायी गई. चुप ताजिये के जुलूस के समापन के बाद अंजुमन काज़मिया आब्दिया के तत्वावधान में काज़मैन में मजलिस का आयोजन किया गया. जिसको मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अशफाक साहब ने खिताब किया. मजलिस के बाद दो बजे दिन से निर्धारित मार्गों से अंजुमन हाय मातमी के आने का सिलसिला शुरू हुआ जिसमें दूसरे शहरों की लगभग 250 अंजुमनें जिनमें अंजुमन असगरिया, क़मरे बनी हाशिम गोलापार्क, सुल्तानपुर, अंजुमन अज़ाए हुसैन उन्नाव, अंजुमन फरोग़े अज़ा बाराबंकी, अंजुमन हैदरी महमूदाबाद आदि शामिल हैं. इसके अतिरिक्त अंजुमन मजलूमिया, गुन्चए मजलूमिया, रौनके़ दीने-इस्लाम, शब्बीरिया, नय्यरूल इस्लाम, गुलदस्त-ए-हैदरी, शहीदाने करबला, मेराजुल इस्लाम, रज़ाए हुसैन, गुन्चए मेहदिया, जफरूल ईमान, अब्बासिया, दस्ते-हैदरी, फरोगे़- इस्लाम, नासिरया, दस्तए-ख़तीबुल-ईमान, हुसैनिया क़दीम सहित विभिन्न अंजुमनों ने शिरकत की.


इसके बाद अंजुमन काजमिया आबिदया ने अपना अलम मुबारक उठाया. अंजुमन की अलविदाई मजलिस हुई जिसे मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अशफाक ने खिताब किया.

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