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सिब्बल की राज्यसभा यात्रा आसान कराएंगी मायावती !

 Tahlka News |  2016-06-05 09:06:54.0

sibbal maya

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती के ताजा रुख से यूपी से राज्यसभा के लिए कांग्रेसी उम्मीदवार कपिल सिब्बल को निश्चित ही सूकून मिल सकता है. कपिल सिब्बल के लिए मोर्चा सम्हाले रणनीतिकारो को उम्मीद है कि राज्यसभा के लिए जरूरी 34 वोटो के इंतजाम में उन्हें कोई बड़ी मुश्किल नहीं आने वाली.

बसपा सुप्रीमो मायावती के शनिवार को भाजपा पर तगड़ा हल्ला बोला था. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने नरेन्द्र मोदी की सरकार को खूब कोसा. इसके थोड़ी ही देर बाद बसपा सुप्रीमो ने मध्य प्रदेश में राज्यसभा के लिए कांग्रेसी उम्मीदवार विवेक तनखा के पक्ष में वोट करने का निर्देश अपने विधायको को दे दिया.


मायावती का यह रुख इस बात के पर्याप्त संकेत देता है कि यूपी में भी बसपा अपने विधायको को भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति महापात्र के पक्ष में बहकाने नहीं देना चाहती. ऐसे में उसके बचे हुए वोट सिब्बल के पक्ष में जा सकते हैं.

हालाकि मायावती के सामने बड़ी चुनौती अपने कुछ विधायको को क्रास वोटिंग से बचने की भी है. बीते दिनों बसपा से निकले गए और अब भाजपा के नेता जुगुल किशोर को भाजपा ने बसपा के कुछ विधायको से संपर्क करने में लगाया हुआ है. भाजपा ने राज्य सभा में जहा प्रीति महापात्र के जरिये निर्दलीय प्रत्याशी पर दाँव खेला है वही विधान परिषद् में दयाशंकर सिंह के रूप में दूसरा प्रत्याशी सीधे ही उतार दिया है.
प्रीति महापात्रा  के जरिये भाजपा का मुख्य निशाना कांग्रेसी उम्मीदवार कपिल सिब्बल ही हैं. भाजपा चाहती है कि इस चुनावो में कांग्रेस का प्रत्याशी हार जाये या फिर समाजवादी पार्टी को झटका लगे. सपा के बागी रामपाल के रूप में उसे एक नया समर्थक भी मिल गया है. साथ ही कांग्रेस के भी 4 विधायको को अपने पाले में आने की उम्मीद भाजपा कर रही है. मगर यह भी साफ़ है बिना बसपा में सेंध लगाये प्रीति चौधरी को कामयाबी नहीं मिल सकती.

मायावती के शनिवार के रुख से यह संकेत दिख रहा है कि वे अपने दो प्रत्याशियों के अलावा बचे वोटो को कपिल सिब्बल के पक्ष में डलवा सकती है. ऐसे में सिब्बल का बेडा पार हो जायेगा और फिर समाजवादी पार्टी का सातवां प्रत्याशी भी कौमी एकता दल और लोक दल के सहारे अपनी सीट निकाल लेगा.

इस पूरे खेल में अब निगाहे अजीत सिंह के राष्ट्रीय लोकदल के 8 विधायको पर टिकी है. हांलाकि ये सब भी अगर प्रीति महापात्रा को वोट करते हैं तो भी प्रीति की राह बहुत आसान नहीं होती दिखाई दे रही है . बीते दिनों भाजपा नेताओं द्वारा कथित रूप से अपमानित किए गए और भाजपा के जाट नेताओं द्वारा अजीत सिंह का सख्त विरोध करने के बाद अजीत सिंह फिर भाजपा का समर्थन करेंगे इस बात की सम्भावनाये भी कम ही है.

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