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स्वामी प्रसाद पकड़ेंगे भाजपा का दामन या जायेंगे नितीश के साथ ?

 Tahlka News |  2016-06-24 10:42:24.0

swami maurya

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. बीएसपी से बगावत कर सूबे का सियासी पारा चढाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या के तेवरों ने सपा और भाजपा के पेशानी पर बल ला दिए हैं. एक दिन पहले तक स्वामी प्रसाद  का स्वागत करने को तैयार समाजवादी पार्टी के बड़े नेता अब स्वामी के मानसिक संतुलन बिगड़ने की बात कहते हुए उन्हें वापस बसपा में लौटने की सलाह देने में जुट गए हैं.

इस बीच भाजपा भी स्वामी प्रसाद मौर्या का स्वागत और विरोध के बीच उलझी हुयी है. पार्टी के प्रवक्ता इंद्र पाल सिंह ने अपनी फेसबुक वाल पर स्वामी को पैसा बनाने वाला लिख दिया था तो वही पार्टी के दूसरे नेता स्वामी प्रसाद को अपने साथ आने के संकेत दे रहे हैं.


इन सबके बीच स्वामी प्रसाद मौर्या नए नए पैंतरे दिखा रहे हैं. गुरुवार रात उन्होंने सपा और भाजपा दोनों को सूबे में दंगे फ़ैलाने का जिम्मेदार बता दिया. इसके पहले उनके समाजवादी पार्टी की साईकिल पर सवार होने की अटकलें जोर पकड़ रही थी.

अब स्वामी प्रसाद ने 1 जुलाई को एक मीटिंग का ऐलान कर दिया है. उनके समर्थको का दावा है कि स्वामी प्रसाद मौर्या के साथ बसपा के 25 विधायक टूट कर आने को तैयार हैं.

लखनऊ की सियासी गर्मी को बढ़ा कर स्वामी प्रसाद मौर्या खुद दिल्ली चले गए हैं.

बताया जा रहा है कि बसपा छोड़ने से पहले स्वामी प्रसाद मौर्या ने भाजपा के प्रभारी ओम माथुर से बात की थी. स्वामी ने उन्हें यूपी में भाजपा का सीएम चेहरा बनाने की मांग की , मगर भाजपा इस पर तैयार नहीं हुयी. बावजूद इसके स्वामी प्रसाद अभी भी ओम माथुर से संपर्क में हैं.

संभावना यह भी है कि स्वामी प्रसाद मौर्य दिल्ली में ओम माथुर से मुलाकात करेंगे और फिर अपना निर्णय लेंगे.

इस बीच उनके समर्थको के खेमे से नयी खबर ये आ रही है कि स्वामी अपनी खुद की पार्टी भी बना सकते हैं या फिर नितीश कुमार के खेमे में भी जा सकते हैं.

इस कयास के पीछे कुछ दम भी दिखाई दे रहा है. इस बात में अब कोई संशय नहीं है कि 2017 के विधान सभा चुनावो में नितीश कुमार यूपी की सियासी पिच पर बैटिंग करने का मन बना चुके हैं मगर उन्हें अपनी पार्टी जनता दल यू की जमीनी हैसियत भी बखूबी पता है.

नितीश की निगाह सूबे के ही किसी कद्दावर नेता की तलाश कर रही है. पहले उन्होंने रालोद के मुखिया अजीत सिंह को साथ लाने की कोशिश की मगर अजीत अपनी पार्टी का विलय करने को तैयार नहीं हैं, सो बात नहीं बन सकी.

अब स्वामी प्रसाद मौर्या के रूप में नितीश को एक नयी संभावना दिखाई दे रही है. बीते 36 सालो से यूपी की सियासत में सक्रिय स्वामी प्रसाद मौर्या के समर्थक लगभग हर जिले में हैं. वे जिस पिछड़ी जाति से आते हैं उसका वोट भी 8 प्रतिशत है. खुद नितीश भी उसी जाति से आते हैं. साथ ही साथ बसपा में प्रमुख भूमिका निभाते रहे स्वामी प्रसाद मौर्य अपने साथ पूर्व बसपा नेता दद्दू प्रसाद को भी ला सकते हैं. दलित जाती से आने वाले दद्दू प्रसाद का बुंदेलखंड में अपना जनाधार है मगर बसपा से निकले जाने के बाद वे लगभग निष्क्रिय ही रहे.

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