Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

पेशे से गद्दारी करते भगवान

 Sabahat Vijeta |  2016-06-02 16:57:55.0

sandeepशबाहत हुसैन विजेता


लखनऊ. संदीप रस्तोगी ने आज मेडिकल कालेज की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की. तस्वीर देखकर सर शर्म से झुक गया. सफ़ेद कोट पहनने वालों को बचपन से ही भगवान जैसा समझता आया था लेकिन यह तो इंसान कहलाने के भी लायक नहीं हैं. दर्द से कराहते मरीज़ को देखकर मुस्कुराती यह दोनों सफ़ेद कोट पहनने वाली वास्तव में महिला के नाम पर भी कलंक हैं और डाक्टर के नाम पर भी बदनुमा धब्बा हैं.


मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद जो डाक्टर बनता है वह यह क़सम खाता है कि वह दर्द से कराहते हुए मजबूरों का दर्द चुरा लेगा. उसके चेहरे से उदासी छीन लेगा. उसके अन्दर फिर से जीने का जज्बा पैदा करेगा. आज अचानक याद आ गया लखनऊ के सिविल अस्पताल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा का लोकार्पण था. मुख्य अतिथि तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे. उन्होंने कहा था कि मैं किसी मंदिर के सामने सर नहीं झुकाता. मेरा सर झुकता है अस्पताल के सामने जहाँ पीड़ित को नई ज़िन्दगी मिलती है. मेरा सर झुकता है स्कूल के सामने जहाँ देश का भविष्य बनता है. तब खूब तालियाँ बजी थीं लेकिन अब लगता है कि अब न वह स्कूल रहे न अस्पताल जिनके सामने सर झुके. अब स्कूल और अस्पताल दोनों ही मिशन से प्रोफेशन बन चुके हैं. प्रोफेशन भी ऐसे कि किसी की जान भी चली जाए तो परवाह नहीं. सिर्फ मेरा भला होना चाहिए.


शर्म आनी चाहिए उन डाक्टरों को जो अपनी मांगों के लिए मरीजों की ज़िन्दगी दांव पर लगा देते हैं. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राज्य में मेडिकल सुविधाओं को बढ़ाना चाहते हैं. सभी अस्पतालों के डाक्टरों का वेतन पीजीआई के बराबर करना चाहते हैं लेकिन यहाँ काम करने वाले डाक्टर जब देखो तब हड़ताल पर उतारू नज़र आते हैं.


ठीक है सबकी ज़रूरतें हो सकती हैं. उन्हें पूरा भी होना चाहिए लेकिन किसी की जान की कीमत पर नहीं. अगर डाक्टर हड़ताल करता है तो वह अपने मिशन (पेशे) के साथ गद्दारी करता है. कल अगर डाक्टर और वकीलों की तरह से पुलिस भी हड़ताल कर दे. कल अगर सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट एक साथ छुट्टी पर चले जाएँ. सारे न्यूज़ चैनल एक साथ ख़बरें दिखाना बंद कर दें. सारे अखबार एक हफ्ते की छुट्टी ले लें. रेलवे के सभी ड्राइवर एक साथ छुट्टी पर चले जाएँ. यह सब तो बहुत दूर की बात है अगर डाक्टर के बताए पैथालोजी पर लोग जांच कराना बंद कर दें और बाहर की लिखी दवाएं खरीदने से इनकार कर यह अड़ जाएँ कि दवा लिखी है तो यहीं से दिलाओ. बगैर दवा के जायेंगे नहीं तो आटे-दाल का भाव पता चल जाएगा.


सरकार कहती है कि सभी टेस्ट फ्री हैं तो फिर बाहर की पैथालोजी से जांच क्यों कराई जाती है? सरकार सभी दवाइयों का पैसा देती है तो स्टाक में दवा क्यों नहीं रहती? जब सरकार तनख्वाह देती है तो फिर नर्सिंग होम में सरकारी डाक्टरों के नाम कैसे लिखे हैं? प्राइवेट प्रैक्टिस का धंधा चल कैसे रहा है?


मरीज़ जान से जा रहा है तब अगर किसी डाक्टर के चेहरे पर विजयी मुस्कान उभरती है तो ऐसे डाक्टर को फ़ौरन बर्खास्त किया जाना चाहिए.


यूपी में सिर्फ कानून व्यवस्था ही मुख्य मुद्दा नहीं है. डाक्टरों की पेशे से गद्दारी, और वकीलों की आये दिन सड़कों पर होने वाली गुंडई आम लोगों का जीना दूभर किये है. पेशे से गद्दारी करने वालों को सरकार सबक नहीं सिखाएगी तो आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था की तरह से यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था भी कैंसर की तरह से उभरेगी. तब हालात को काबू में कर पाना संभव नहीं होगा.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top