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अब क्या होगा अखिलेश का अगला कदम ?

 Tahlka News |  2016-12-30 15:40:52.0

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उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी से बाहर का रास्ता तो मुलायम सिंह ने दिखा दिया मगर अब अखिलेश खेमा क्या करेगा इस पर सबकी निगाह लगी हुयी है सूत्रों का कहना है कि इस बात का न सिर्फ अखिलेश खेमें को पहले से था बल्कि यह उनके मनमाफिक फैसला भी है. अखिलेश यादव की हमेशा से यही कोशिश थी कि या तो पार्टी में उनकी चले या फिर उन्हें पार्टी से निकल दिया जाय. बीते तीन दिनों में एक के बाद एक इसी दिशा में कदम भी उठाये जा रहे थे. रामगोपाल द्वारा राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा की बैठक बुलाने का पत्र जब जारी किया गया मुलायम के सब्र का बाँध टूट गया और रामगोपाल के साथ साथ अखिलेश के निष्कासन की घोषणा भी हो गयी.

हांलाकि मुलायम के इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने कहा, ‘हम ही असली समाजवादी पार्टी हैं. नेताजी अभी भी हमारे नेता हैं. मेरे पिताजी के करीबी लोग अपने फायदे के लिए उन्हें दिग्भ्रमित कर रहे हैं. हम पिछले पांच सालों के दौरान किए गए अपने कार्यों के आधार पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं. लोग हमारे किए गए कामों के लिए हमें वोट करेंगे. हमने अब तक किसी के साथ गठबंधन का फैसला नहीं किया है.’

सूत्र बताते हैं कि अखिलेश खेमें ने ऐसी स्थिति के लिए तैयारियाँ पहले ही कर रखी हैं. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर द्वारा गठीत जिस “समाजवादी जनता पार्टी” को 25 साल पहले मुलायम सिंह ने छोड़ कर समाजवादी पार्टी बनायीं थी, वही अब अखिलेश यादव का संबल बनेगी. सूत्र यह भी बताते हैं कि जब 2 महीने पहले पार्टी में संघर्ष की स्थिति बनी थी उसी वक्त समाजवादी जनता पार्टी के लिए कमल मोरारका से संपर्क भी किया जा चुका था. इस सिलसिले में चंद्रशेखर के सांसद बेटे नीरज शेखर का सहयोग भी अखिलेश खेमे को मिला था. ऐसे में अखिलेश को यदि नयी पार्टी बनाने की जरुरत पड़ती है तो उसके पास समाजवादी ब्रांड भी होगा और चुनाव आयोग द्वारा स्वीकृत “बरगद” चुनाव चिह्न भी मौजूद होगा.

अखिलेश के निष्कासन के बाद समाजवादी पार्टी से इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया है. इस बीच अखिलेश यादव ने राज्यपाल से मिलने का वक्त भी मांग लिया है और संभवतः वे विधानसभा भंग करने की सिफारिश भी कर सकते हैं.

विश्लेषकों के एक समूह का मानना है कि अखिलेश खेमें की अगली रणनीति यह भी होगी कि समाजवादी पार्टी के अधिकांश जिलाध्यक्षो और पार्टी संगठन के लोगों को साथ ले कर एक आम सभा बुलाई जाए और उसमे शिवपाल और मुलायम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करा दिया जाए , ऐसे में अखिलेश ही पार्टी के नए अध्यक्ष घोषित हो जायेंगे. किसी भी विवाद की दशा में यह भी होगा कि पार्टी के सिम्बल पर दावा दोनों पक्षों का होने के विवाद के कारण साईकिल का सिम्बल भी सीज करा दिया जाए. फिर बरगद चुनाव चिह्न के साथ टीम अखिलेश मैदान में उतर जाए.

हालाकि मुलायम सिंह के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे समर्थको को अखिलेश ने कडा सन्देश दिया है कि वे मुलायम सिंह के खिलाफ कोई अभद्र नारे नहीं लगायें .जाहिर है अखिलेश अपने पिता के बारे में कोई बुरी बात नहीं सुनना चाहते साथ ही कोई ऐसा संकेत भी नहीं देना चाहते जिसासे पुराने समर्थको की आस्था को चोट पहुंचे.

अखिलेश यादव से मिलने करीब 125 विधायक भी पहुँच चुके हैं और समर्थको की भरी भीड़ अखिलेश के घर के बाहर जमा है. उन्होंने सन्देश दिया है कि वे देर रात समर्थको से भी मिलेंगे.

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