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पुस्तक मेले में है किस्से कहानियों का अद्भुत संसार

 Sabahat Vijeta |  2016-10-21 11:24:57.0

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लखनऊ. यह मनोवैज्ञानिक सच है कि इंटरनेट का प्रयोग जहां हमें शारीरिक और मानसिक रूप से थका देता है वहीं किताबें मन-मस्तिष्क, शरीर को आराम देती हैं। यही वजह है कि इंटरनेट के इस दौर में भी पुस्तकों की लोकप्रियता बनी हुई है और इस बात का साबित को साबित कर रहा है मोतीमहल वाटिका लॉन राणाप्रताप मार्ग पर चल रहा गागर में सागर राष्ट्रीय पुस्तक मेला। निःशुल्क प्रवेश वाले पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेमियों की कविता-शायरी, कथा-उपन्यास की तलाश बराबर चल रही है। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के बीच किताबों पर न्यूनतम 10 प्रतिशत की छूट दे रहा ये मेला 23 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा।


मेले में प्रेमचन्द, टैगोर का साहित्य लगभग हर दूसरे स्टाल पर है तो राजकमल के स्टाल पर रांगेय राघव, अमरकान्त, काशीनाथ सिंह, ज्ञानरंजन, यशपाल, मिथिलेश्वर, गीतांजलि श्री, मृदुला गर्ग, इस्मत चुगताई आदि रचनाकारों की प्रतिनिधि कहानियों की किताबें हैं। भारतभूषण अग्रवाल, कुंवर नारायण, विश्वनाथ तिवारी, अमृता प्रीतम की कविताओं को पाठक पसंद कर रहे हैं। राजपाल प्रकाशन ने संस्कृत के कालजयी अमर ग्रन्थ सीरीज के तहत दण्डी, भास, भवभूति, कालिदास, विशाखदत्त, कौटिल्य व विष्णु शर्मा की रचनाओं को हिन्दी में उतारा है। यहां आपको वाल्मीकि की संस्कृत रामायण का हिन्दी रूपांतर भी मिल जाएगा तो शेक्सपीयर के नाटकों का विद्वजनों द्वारा किया अनुवाद भी सुलभ है। प्रभात प्रकाशन के स्टाल में श्रेष्ठ सहित्य तो है ही, अगर आप भाषण कला में निपुण होना चाहते हैं तो यहां ‘विश्व के महान भाषण’ व ‘भारत के महान भाषण’ पुस्तक के साथ ही महेश शर्मा की ‘भाषण कला’ भी मौजूद है। मेले में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित ‘युगंधर’, ‘मृत्युंजय’, ‘महानायक’ जैसे चर्चित उपन्यासों के साथ महाश्वेता देवी सरीखे विख्यात कथाकारों की पुस्तकें हैं। बेहतरीन साहित्य की किताबें नेशनल बुक ट्रस्ट, किताबघर, सस्ता साहित्य मण्डल, साहित्य भण्डार, राधाकृष्ण प्रकाशन, लोकभारती, मंजुल, दीपशिखा व वाणी प्रकाशन में भी हैं। वाणी का सामयिक संदर्भ में समय, समाज व संस्कृति पर केन्द्रित महत्वपूर्ण छमाही प्रकाशन ‘प्रतिमान’ भी बरबस ध्यान खींचता है। पीएम पब्लिकेशन्स में महान व्यक्तित्वों पर आधारित प्रेरक किताबें हैं। आकाशवाणी के स्टाल पर बिक रही सीडी-डीवीडी में विख्यात शास्त्रीय संगीतकारों की दुर्लभ रिकार्डिंग्स भी शामिल हैं।


आज साहित्यिक आयोजनों में सुबह विनय दास के उपन्यास ‘हदनहा ताल’ का लोकार्पण डा.सुधाकर अदीब ने कथाकार शिवमूर्ति, महेन्द्र भीष्म, वीरेन्द्र सारंग व सुभाष राय की उपस्थिति में किया। कादम्बिनी क्लब की ओर से मधु चतुर्वेदी के संयोजन में संगोष्ठी चली। बाद में मनोज शुक्ल की अध्यक्षता में हुए लेखक से मिलिए कार्यक्रम में नीरज द्विवेदी, विजयराज श्रीवास्तव व निवेदिता श्रीवास्तव ने अपनी बात रचनाओं के साथ रखी। इसी क्रम में डा.अमिता दुबे के संचालन में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो.आशा गुप्ता ने हरिओम शर्मा द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘कथालोचना’ व जी. बासु की लिखी ‘लोक प्रशासन के बदलते स्वरूप’ का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने अपनी रचनाधर्मिता के बारे में बताया।


युवा पण्डाल में बच्चों और नययुवाओं की सर्जनात्मक गतिविधियां संचालित हुईं तो मुख्य मंच पर संत निरंकारी मिशन का सत्संग हुआ। गीत एवं नाट्य प्रभाग की ओर से जादू व संगीत कार्यक्रम की प्रस्तुति भी पुस्तक प्रेमियों ने सराही।


मेले में आज 21 अक्टूबर 2016


मुख्य सांस्कृतिक मंच


पूर्वाह्न 11.00 बजे- लोकार्पण- सुश्री बालिका सेनगुप्ता का काव्यसंग्रह ‘आओ नींव रखें उजाले की’
अपराह्न 1.00 बजे- काव्यगोष्ठी- अनंत अनुनाद संस्था
अपराह्न 3.00 बजे- कवयित्री सम्मेलन
सायं 5.00 बजे- शतरूपा सागर सम्मान- डा.मृदुला पण्डित, शीला शर्मा, डा.अमिता दुबे
सायं 6.30 बजे- मुशायरा- याद ए मलिकजादा मंजूर

बाल-युवा मंच
अपराह्न 3.00 बजे- बाल-युवा प्रतियोगिताएं- शंखवादन, श्लोक वाचन, संस्कृत काव्यपाठ व योग प्रदर्शन प्रतियोगिता निरंकारी मिशन ने दिया मानवता का संदेश


गागर में सागर पुस्तक मेले में संत निरंकारी मिशन द्वारा कल शाम आयोजित कार्यक्रम जहां नययुवाओं को सत्कर्मों व सामाजिक दायित्व की प्रेरणा देने वाला था वहीं आज यहां आयोजित संत्संग में आध्यात्मिकता के जरिए मानवता अपनाने की राह उपस्थित जनसमूह को दिखाई गई।


भाई नोतनदास ने कहा कि चेहरे पर मुस्कान बनाये रखने में किसी का कुछ नहीं जाता और खुद के साथ ही दूसरे को प्रसन्न बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि कलम अच्छा भी लिख सकती है और बुरा भी, ठीक उसी तरह कच्ची मिट्टी से हुक्का भी बन सकता है जो लोगों के फेफड़े जलाएगा और सुराही भी, जिसका जल पीने वाले को शीतलता प्रदान करेगा। हमें न हुक्का बनना है और न बनाना है बल्कि मुस्कान लिए सुराही की तरह अंदर बाहर हर तरफ शीतलता, संतुष्टि और मुस्कान बिखेरनी है।

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