अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में घोटाले पर योगी की टेढ़ी नजर

 2017-04-01 12:10:55.0

अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में घोटाले पर योगी की टेढ़ी नजर

तहलका न्यूज ब्यूरो 

लखनऊ. मुख्यमंत्री पद सम्हालने के बाद अपने पहले दौरे में ही योगी आदित्यनाथ ने जिस गोमती रिवर फ्रंट का निरीक्षण किया था, अब उसके घोटाले की जांच के आदेश भी हो गए हैं. अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक "गोमती रिवर फ्रंट" योजना का सञ्चालन शिवपाल यादव के सिचाई महकमे द्वारा किया जा रहा था. योगी ने इस मामले की पूरी जांच 45 दिन में करने के साथ ही खर्च हुयी एक एक पाई का हिसाब माँगा है. 

लन्दन की प्रसिद्ध टेम्स नदी के तर्ज पर लखनऊ की गोमती नदी का सुन्दरीकरण और सफाई की योजना थी. इसके लिए गोमती के दोनों किनारों पर डायफ्राम वाल, और पर्यटकों के लिए पार्क के साथ लम्बा वाक ट्रैक और साईकिल ट्रैक भी बनाया गया था. साथ ही गोमती को गंदे नालो से बचाने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाये जाने थे. इस योजना के निर्माण में हुयी लापरवाही में सिचाई विभाग में शिवपाल के चहेते इंजीनियरों रूप सिंह और अनिल यादव के साथ तीन और अभियंताओं के नाम सामने आये थे.   

जब योगी इस परियोजना का निरीक्षण करने पहुंचे थे तभी उन्होंने इस बात पर गहरा असंतोष जताया था कि सिविल वर्क तो खूब हुआ मगर गोमती में गंदे नाले गिरने से रोकने वाले कामो में कोई प्रगति नहीं हुयी. यह प्रोजेक्ट तय वक्त से काफी पीछे चल रहा है. बताया जाता है की इस परियोजना में शिवपाल यादव ने अपने चहेतों को खूब उपकृत किया था और इंजीनियरों ने ठेकेदारों से मिलीभगत कर परियोजना के लिए आवंटित धन का भी खूब दुरूपयोग किया.  

योगी ने इस मामले में करीब 40 मिनट अधिकारियों के साथ बैठक की. योगी ने रिवर फ्रंट के बजट को लेकर भी सभी विभागों के अधिकारियों से चर्चा की थी. उन्होंने यूपी के मुख्य सचिव राहुल भटनागर को कुछ आदेश भी दिए थे. सीएम योगी ने अधिकारियों के साथ पूरे पार्क का चक्कर लगाया था. 

अखिलेश सरकार में 16 नवंबर 2016 को इसका लोकार्पण हुआ था और उसके बाद यह स्थानीय लोगो का पसंदीदा स्पाट बन गया. 12.1 किलोमीटर के रिवरफ्रंट पर तीन हज़ार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं.

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