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31 मार्च को कांग्रेस साबित करे बहुमत : हाईकोर्ट

 Tahlka News |  2016-03-29 09:43:05.0

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देहरादून, 29 मार्च. उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने को चुनौती देने वाली कांग्रेस याचिका और बागी विधायकों की बर्खास्तगी के मामले पर नैनीताल हाई कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कांग्रेस को 31 मार्च को बहुमत साबित करने के लिए कहा है.इस वोटिंग में बागी विधायक भी हिस्सा ले सकेंगे।


कोर्ट ने सभी 70 विधायकों को आगामी 31 मार्च को विधानसभा में मौजूद रहने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने डीजीपी को विधानसभा की सुरक्षा का ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई आगामी चार अप्रैल को होगी।

कांग्रेस के नौ बागी विधायक भी इस मतदान में शामिल हो सकेंगे। इसके लिए नैनीताल हाईकोर्ट ऑब्जर्वर की नियक्ति करेगा।सुनवाई के बाद अभिषेक मनु‌सिंघवी ने बताया कि हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन के बावजूद राज्यपाल के आदेश को कार्यांवित करते हुए तिथि बदली है।

अब हरीश रावत को 28 की जगह 31 मार्च को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा। उन्होंने बताया कि कांग्रेस की निलंबित विधायकों का निलंबन जारी रहेगा, लेकिन वह मतदान करेंगे और उनके मतदानों को अलग रखा जाएगा। निलंबित विधायकों के मतों पर स्पीकर फैसला लेंगे। उत्तराखंड के पूर्व सीएम रावत की याचिका पर मंगलवार को दूसरे दिन भी नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

उधर, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में विधायकों की खरीद फरोख्त के मामले में जनहित याचिका दायर कर दी गई है। इस याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई होगी।

जस्टिस यू.सी. ध्यानी की सिंगल बेंच में चल रही सुनवाई के दौरान बागी विधायकों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह और दिनेश द्विवेदी ने पैरवी की। सोमवार को तीन घंटे तक चली सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने केंद्र को मंगलवार तक जवाब देने को कहा था।


केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के पीछे दलील पेश की गई लेकिन कोर्ट ने कांग्रेस के हक में आदेश दिया और 31 मार्च को विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
सुप्रीम कोर्ट के वकील एमएल शर्मा ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करके सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने याचिका में कहा कि उत्तराखंड में विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला गंभीर है और इसकी जांच होनी चाहिए।

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