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उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप-लोक आयुक्त (संशोधन) विधेयक, 2015 राष्ट्रपति को संदर्भित 

 Sabahat Vijeta |  2016-05-06 14:07:01.0

RAMNAIKलखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने ‘उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप-लोक आयुक्त (संशोधन) विधेयक, 2015‘ को भारत का संविधान के अनुच्छेद 254(2) के अंतर्गत राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करते हुए राष्ट्रपति को संदर्भित कर दिया है।


राज्यपाल ने ‘उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप-लोक आयुक्त (संशोधन) विधेयक, 2015‘ के परीक्षण के बाद कहा है कि राज्य विधान मण्डल से पारित संशोधित विधेयक में लोक आयुक्त की चयन प्रक्रिया से मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय की भूमिका को समाप्त कर दिया गया है, जबकि केन्द्रीय अधिनियम में लोकपाल के चयन में मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय की भूमिका महत्वपूर्ण है। मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय की भूमिका को लोक आयुक्त चयन प्रक्रिया से समाप्त करने से केन्द्रीय अधिनियम ‘लोकपाल तथा लोक आयुक्त अधिनियम, 2013‘ की धारा-4 की उपधारा (1) के विरोधाभासी प्रतीत होता है। इस दृष्टि से राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप-लोक आयुक्त (संशोधन) विधेयक, 2015‘ को राष्ट्रपति को संदर्भित करने का निर्णय लिया है।


राज्यपाल ने इस आशय की जानकारी मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव को भी दे दी है।

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