Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

ओबामा ने की पुष्टि तालिबान सरगना मुल्ला मंसूर मारा गया

 Sabahat Vijeta |  2016-05-23 17:33:01.0

mulla-mansoorवाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में दो दिन पहले हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में तालिबान सरगना मुल्ला अख्तर मंसूर के मारे जाने की पुष्टि की है। ओबामा का यह बयान व्हाइट हाउस की ओर से ऐसे समय में जारी किया गया है, जबकि पाकिस्तान अब भी हमले में मंसूर के मारे जाने को लेकर संशय जता रहा है। साथ ही उसने अपनी जानकारी के बगैर हुए इस हमले को देश की संप्रभुता का हनन भी करार दिया है और इसको लेकर अमेरिका से विरोध जताया है।


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने रविवार देर रात कहा था कि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया शख्स तालिबान सरगना मंसूर है। लंदन पहुंचे नवाज ने संवाददाताओं से कहा कि हालांकि इस बारे में उन्हें अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी का फोन आया था, जिसमें ड्रोन हमले की जानकारी दी गई थी। लेकिन यह जानकारी हमले के बाद दी गई।


नवाज ने यह भी कहा कि केरी का फोन आने के बाद उन्होंने सेना प्रमुख से बात की। विदेश मंत्रालय से एक बयान भी जारी किया गया, जिसमें अमेरिकी ड्रोन हमले को देश की संप्रभुता का हनन करार देते हुए इसे लेकर विरोध जताया गया है।


पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का यह भी कहना है कि अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया शख्स पाकिस्तानी नागरिक वली मुहम्मद है, जिसकी पुष्टि वहां से बरामद एक पासपोर्ट से होती है। माना जा रहा है कि यह पासपोर्ट धारक 21 मई को ही ईरान से पाकिस्तान लौटा था, जिस दिन मंसूर को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया गया।


वियतनाम की यात्रा पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस बारे में कहा, "हम पाकिस्तान के साथ साझा उद्देश्यों पर काम करेंगे। जिन आतंकवादियों से हमारे देशवासियों को खतरा है उन्हें सुरक्षित पनाहगाह नहीं मिलना चाहिए। इतने सालों के संघर्ष के बाद अफगानिस्तान के लोगों और इस क्षेत्र को आज एक अलग और बेहतर भविष्य का मौका मिला है।"


"मंसूर ने अफगानिस्तान सरकार के शांति वार्ता की पेशकश दक्षिण एशिया के इस देश में हिंसा को रोकने के प्रयासों को खारिज कर दिया था।" उन्होंने कहा कि आतंकवादी समूहों द्वारा जारी हिंसा में अब तक अनगिनत अफगान पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की जान गई है।


ओबामा ने कहा, "तालिबान को इस दीर्घकालीन संघर्ष को समाप्त करने के लिए अफगानिस्तान सरकार के साथ शांति एवं सुलह प्रक्रिया के मार्ग पर आगे बढ़ने के अवसर का लाभ उठाना चाहिए।" ओबामा ने यह भी कहा कि अमेरिका अफगानिस्तानी सुरक्षा बलों की लगातार मदद करता रहेगा और राष्ट्रपति अशरफ घनी के अफगान के लोगों के लिए शांति और प्रगति के प्रयासों का सर्मथन करता रहेगा।


ओबामा ने कहा कि अमेरिका निरतंर उसके और उसकी गठबंधन सेना को निशाना बनाने वाले आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करता रहेगा। जॉन केरी ने शनिवार को अफगान और पाकिस्तान सरकार को ओबामा द्वारा अधिकृत इस हमले की सूचना दी थी, जिसमें पाकिस्तान-अफगान सीमा पर स्थित शहर क्वेटा के नजदीक अहमेद वल में मंसूर को निशाना बनाया गया।


वहीं, व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में ओबामा ने कहा कि मुल्ला मंसूर का मारा जाना अफगानिस्तान में शांति बहाली के दीर्घकालीन प्रयासों की दिशा में मील का पत्थर है। बयान के मुताबिक, "मंसूर के मारे जाने से उस आतंकवादी संगठन के सरगना का खात्मा हो गया है, जो अमेरिका पर हमले की साजिश में लगा हुआ था और अफगानिस्तान में युद्ध का जिम्मेदार था।"


उन्होंने अमेरिका और उसकी गठबंधन सेना को निशाना बनाने वालों को स्पष्ट संदेश देने के लिए अमेरिकी सेना का धन्यवाद किया। नाटो के सेक्रेटरी जनरल जेंस स्टोलेनबर्ग ने कहा कि मंसूर की मौत से अफगानिस्तान में शांति की दिशा में प्रगति का एक अवसर है।


उन्होंने एक बयान जारी कर कहा, "इस तालिबान नेता ने अनगिनत अफगान नागरिकों और सुरक्षा बलों की जान ली थी।" मंसूर ने तालिबान के पूर्व नेता मुल्ला उमर के मौत के दो सालों बाद समूह की कमान संभाली थी। तालिबान नेता के इस मौत से एक तरफ जहां शांति प्रयासों पर वहीं, दूसरी अमेरिका के पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर भी असर पड़ने की संभावना है।


मंसूर की मौत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अमेरिका और चीन के नेताओं के ताजा दौर की इस्लामाबाद में हुई बातचीत के एक दिन बाद हुई है, जिसमें तालिबान को शांति वार्ता के लिए तैयार करने के प्रयासों पर चर्चा हुई थी।


मंसूर की मौत से तालिबान का काफी धक्का लगा है। पर्यवेक्षकों का मानना है इससे समूह में नेतृत्व को लेकर एक बार फिर खींचतान शुरू हो सकती है। मंसूर की मौत के बाद रविवार को तालिबान के शीर्ष नेताओं ने आपस में मुलाकात की और आगे की कार्ययोजना तैयार की।


तालिबान के शीर्ष नेतृत्व ने नए नेता के तौर पर कई नामों पर विचार किया, जिनमें कुख्यात गुरिल्ला कमांडर सिराजुद्दीन हक्कानी का नाम भी था। हक्कानी कुख्यात हक्कानी आतंकवादी समूह का सरगना है और कहा जाता है कि मुल्ला मुहम्मद ओमर की मौत के बाद उसने तालिबान के नेतृत्व के संकट सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी।


सूत्रों के मुताबिक, तालिबान इसके अलावा मुल्ला याकूब के नाम पर विचार कर सकती है, जो मुल्ला उमर का बेटा है। वह अपने पिता के नाम की वजह से संभावित एकता का सूत्रधार बन सकता है। हालांकि तालिबान ने अभी मंसूर की मौत के बार में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top