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राजभवन में होगा आयुर्वेदीय औषधि पौधों और जड़ी-बूटियों का प्रदर्शन

 shabahat |  2017-02-24 13:35:13.0

राजभवन में होगा आयुर्वेदीय औषधि पौधों और जड़ी-बूटियों का प्रदर्शन


लखनऊ. राजभवन प्रांगण में 25 और 26 फरवरी को आयोजित होने वाली प्रादेशिक शाक-भाजी, फल एवं पुष्प प्रदर्शनी में ''धन्वन्तरि वाटिका'' राजभवन द्वारा आयुर्वेदीय औषधि पौधों एवं जड़ी-बूटियों का एक प्रदर्श लगाया जायेगा. धन्वन्तरि वाटिका द्वारा लगाये जाने वाले इस स्टाल से धन्वन्तरि वाटिका राजभवन द्वारा प्रकाशित ''शतायु की ओर'' पत्रक के सोलहवें अंक, जो आयुर्वेद द्वारा मधुमेह निवारण एवं नियंत्रण से संबंधित है, का निःशुल्क वितरण किया जायेगा. इसके साथ ही स्वस्थ कैसे रहें तथा सर्वसुलभ औषधीय पौधों के प्रयोग से संबंधित ज्ञानवर्धक ''आयुर्वेद और स्वास्थ्य'' तथा ''आयुर्वेदो मृतानाम्'' पत्रकों का भी वितरण किया जायेगा.

उल्लेखनीय है कि राजभवन में औषधीय पौधों की एक वाटिका ''धन्वन्तरि वाटिका'' स्थापित है. प्रभारी अधिकारी धन्वन्तरि वाटिका, राजभवन एवं आयुर्वेदाचार्य डॉ. शिव शंकर त्रिपाठी ने बताया कि इस वाटिका की स्थापना 24 फरवरी, 2001 को हुई थी, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री द्वारा कुछ औषधि पौधे रोपित कर किया गया था. वाटिका की स्थापना का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेदीय औषधि पौधों के ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है. निरन्तर संवर्धन के फलस्वरूप वर्तमान में यह वाटिका प्रदेश में औषधीय पौंधों की एक आदर्श वाटिका के रूप में जानी जाती है. उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शनी में पुत्रजीवक, पिप्पली, नागरमोथा, अश्वगंधा, अन्तमूल, वंशलोचन, पुनर्नवा, अस्थिश्रृंखला, काकमाची, सैरेयक, घृतकुमारी, ब्राह्मी, शतावरी, समी, वासा, कुटज, निर्गुण्डी, स्नुही, वनफ्सा, हरीतकी, विभीतकी तथा गुड़मार आदि 200 से अधिक दुर्लभ जड़ी-बूटियों एवं औषधि पौधों को प्रदर्शित किया जायेगा.

धन्वन्तरि वाटिका, राजभवन द्वारा प्रकाशित 'शतायु की ओर' के सोलहवें अंक के बारे में प्रभारी चिकित्साधिकारी आयुर्वेद एवं प्रभारी अधिकारी धन्वन्तरि वाटिका डॉ. शिव शंकर त्रिपाठी ने बताया कि आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इस वर्ष धन्वंतरि जयंती को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस घोषित करते हुये उसका मूल विषय 'आयुर्वेद के द्वारा मधुमेह निवारण एवं नियंत्रण' निर्धारित किया गया था. इसलिये इस अंक का विषय मधुमेह रखा गया. उन्होंने बताया कि मुधमेह के रोगियों में हो रही निरन्तर बढ़ोत्तरी से पूरा विश्व चिन्तित है. मधुमेह (डायबिटिज) एक जीवनशैली जन्य रोग है, जिसका निवारण एवं नियंत्रण आयुर्वेद शास्त्रों में वर्णित जीवन-यापन के सिद्धांतों को अपनाकर किया जा सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि मधुमेह के वे रोगी जो एलोपैथिक औषधियाँ ले रहे होते हैं, वे आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग एवं वर्णित जीवन-यापन सिद्धांत (आहार-विहार) का भी पालन साथ-साथ करते हैं तो मधुमेह को नियंत्रित करने में आशातीत लाभ होता है.

डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि ''आयुर्वेद और स्वास्थ्य'' पत्रक में आयुर्वेद ऋषियों द्वारा बतायी गई ऋतृचर्या एवं स्वास्थ्य रक्षक सूत्रों का उल्लेख किया गया है, जिनका पालन कर हम सदैव निरोग रह सकते हैं तथा ''आयुर्वेदो मृतानाम्'' पत्रक में स्वास्थ्य लाभ हेतु 30 विशिष्ट औषधि पौधों के गुण एवं उनके उपयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी भी दी गई है.

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