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आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का सशक्त माध्यम है संस्कृतभाषा: गोपबन्धु पटनायक

 2017-03-07 17:32:28.0

आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का सशक्त माध्यम है संस्कृतभाषा: गोपबन्धु पटनायक

तहलका न्यूज़ ब्यूरो
लखनऊ. आज दिनांक 07 मार्च 2017 को राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान (लखनऊ परिसर), गोमतीनगर, लखनऊ में 'परम्परा और आधुनिकता : समाज और साहित्य के सन्दर्भ में' विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रिय संगोष्ठी के सम्पूर्ति-सत्र का आयोजन हुआ, कार्यक्रम का आरम्भ माँ सरस्वती के प्रति वैदिक तथा लौकिक मंगलाचरण के साथ हुआ. उसके बाद संस्थान के आधुनिक विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय ने द्विदिवसीय कार्यक्रम की विवेचना प्रस्तुत करते हुए सभी का कार्यक्रम में स्वागत किया तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोपबन्धु पटनायक को सन्दर्भित करते हुए कहा कि शिक्षा के क्रम में व्यवहारिक शिक्षा अत्यंत महत्त्वपूर्ण है और मुख्यातिथि में इस ज्ञान को छात्रों में स्थानान्तरित करने की कुशलता है.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोपबन्धु पटनायक (उ.प्र. वेतन समिति के अध्यक्ष) ने संगोष्ठी के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परम्परा और आधुनिकता के मध्य सेतु के रूप में समसामयिक तत्त्व होता है जैसे विवाह संस्कार के अन्तर्गत जयमाल परम्परागत रूप से प्राप्त नहीं होता परन्तु आधुनिक समाज में जयमाल ही विवाह संस्कार के सम्पन्न होने का प्रतीक हो गया है. इसी क्रम में शास्त्रों में कहे गए शान्तिपाठ को भी आधुनिकता का प्रमाण बताया जिसकी पुष्टि ब्रिटिश विद्वान टिन मार्टिन के द्वारा की गयी जिसमें कहा गया है कि हमें अपने और अपने आस-पास स्थित वातावरण के लिए सदैव विचार करना चाहिये और उनको उन्नत करने के लिए प्रयास करना चाहिए, जैसा कि शान्तिपाठ में कहा गया है. इसके साथ ही संस्कृत भाषा को निरपेक्ष बताते हुए उसके अन्तर्गत योग, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, खगोल आदि विषयों के वैज्ञानिक प्रसार पर बल दिया. उन्होंने संस्कृतभाषा को आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (A.I.) का सशक्त माध्यम बताया जिसकी खोज में आधुनिक वैज्ञानिक संस्कृत भाषा के व्याकरण को अत्यन्त उपयोगी मान रहे हैं.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुरेन्द्र पाठक ने आधुनिकता और परंपरा के कई प्रसंगों का उल्लेख किया. इस अवसर पर पटनायक ने वैदिक और प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को अंगवस्त्र और उपहार देकर सम्मानित किया. कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन डॉ एस पी सिंह तथा सञ्चालन डॉ कविता बिसारिया के द्वारा किया गयाण् सम्पूर्ति-सत्र में प्रो. उमारमण झा (पूर्वप्राचार्य.रा०सं०सं०) , प्रो. रामसागर मिश्र, डॉ अवधेश चौबे, प्रो. मदन मोहन पाठक, डॉ अमित शुक्ल, प्रो. अवनीश अग्रवाल, डॉ ज्योतिप्रसाद दाश, डॉ रामबहादुर दुबे, डॉ अनिल कुमार पोरवाल अन्य विद्वान तथा शोध छात्र उपस्थित थे.

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