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राब्ता - शरीर और आत्मा का संयोग

 shabahat |  2017-03-15 16:15:31.0

राब्ता - शरीर और आत्मा का संयोग


तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. मेरे लखनऊ आने का उद्देश्य सबकी सहभागिता से एक ऐसी नृत्य प्रस्तुति की रचना करना है जो अनुपालन और एकरूपता से परे विशिष्टता और मौलिकता का उत्सव हो. जिसमें प्रशिक्षार्थियों को एक सीमा में बांध देने के बजाय उनकी कल्पनाओं की उड़ान को खुला आसमान दिया जाए. प्रशिक्षण, सम्पूर्ण रचना प्रक्रिया और अंततः प्रस्तुति के समय छात्र सिर्फ सीखे-सिखाये अंग और पद संचालन तक ही सीमित न रहकर स्वयं गहराइयों से महसूस किए हाव-भाव का भी प्रदर्शन करें.

यह बात ग्रीस की विश्व प्रसिद्ध नृत्यांगना व नृत्य निर्देशक जेनिचा सोलेदाद युआन ने दुनिया भर में अपनी कला-संस्कृति व साहित्य के लिए मशहूर लखनऊ में कहीं. जेनिचा यहोवा अकादमी फ़ॉर परफार्मिंग आर्ट्स द्वारा आयोजित 18 मार्च से 15 अप्रैल तक राब्ता - शरीर और आत्मा का संयोग शीर्षक से एक प्रस्तुति परक नृत्य कार्यशाला का संचालन करने लखनऊ आयी हैं जो इस कार्यशाला के सम्बन्ध में अकादमी द्वारा लखनऊ प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बोल रही थीं.

शरीर और आत्मा के सृजनात्मक सम्बन्ध पर आधारित इस कार्यशाला का संचालन जेनिचा सोलेदाद युआन व अकादमी के कला निदेशक पुनीत मित्तल करेंगे. वियेना की इंम्प्यूतांज डांस कम्पनी में शिक्षक और कई अंतरराष्ट्रीय नृत्य प्रशिक्षण केन्द्रों में अतिथि प्रशिक्षक ज़ेनिका सालसा जैसे सोशल पार्टनर नृत्य, अर्जेन्टीना के टैंगो, ब्राज़ील के ज़ॉक और लैटिन बॉलरूम, जापान के बूतो, कोंटैक्ट इंप्रोवाईज़ेशन (प्रस्तुति की शुरुआत में और उसके दौरान शारीरिक स्पर्श ), मनोशारीरिक थियेटर, स्विंग, कंटेपरेरी व अन्य आधुनिक नृत्य शैलियों में पारंगत हैं.

यहोवा अकादमी के कला निदेशक पुनीत मित्तल ने कार्यशाला की थीम और कार्य योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि लखनऊ में अपनी तरह की यह पहली नृत्य कार्यशाला है जिसमें नृत्य की कई अंतरराष्ट्रीय शैलियों का प्रशिक्षण एक साथ दिया जाएगा जो प्रतिभागियों को वर्तमान समय में विश्व पटल पर होने वाले नृत्य सम्बन्धी गतिविधियों से भी अवगत कराएगा. इसी क्रम में अकादमी के अध्यक्ष जितेन्द्र मित्तल ने भावी योजनाओं की रूपरेखा के बारे में भी बताया.

जेनिका ने कहा कि मैं नृत्य के सागर में गोते लगाती रहती हूँ और बहुत सी अनुभूतियों की एक श्रंखला बनाकर अपने होने को पूरी एकाग्रता से महसूस करती हूँ और मंच के स्पेस को एक ऐसा प्रदर्शन स्थल बना देना चाहती हूँ जहां शरीर संचालन और आत्मा की उड़ान का संयोग हो जाए. अपनी कला के सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया हर तरह की टेक्नोलोजी से लैस है और मानवीय मूल्य लगातार गिरते जा रहे हैं ऐसे में नृत्य एक प्रभावशाली माध्यम है जो दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

18 मार्च से 15 अप्रैल तक नित्य चलने वाली इस कार्यशाला में अपराह्न 3:00 से 4:30, शाम 5:00 से 6:30 व 6:30 से 8:00 बजे तक तीन बैच चलेंगे जिनका प्रशिक्षण शुल्क एक हज़ार रुपये है.

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