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64 कलाओं में राजनीति को भी शामिल करिये

 shabahat |  2017-01-17 14:04:20.0

64 कलाओं में राजनीति को भी शामिल करिये

भारतेन्दु नाट्य अकादमी का दीक्षान्त समारोह सम्पन्न

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज भारतेन्दु नाट्य अकादमी द्वारा आयोजित तीसरे दीक्षान्त समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। इस अवसर पर डाॅ. सरिता शर्मा, अनीस अंसारी पूर्व कुलपति, निदेशक भारतेन्दु नाट्य अकादमी नरेश चन्द्र गुप्ता, श्रीमती नादिरा बब्बर सहित अन्य वरिष्ठ रंगकर्मी व नाट्य कला से जुड़ी विभूतियाँ भी उपस्थित थीं।

राज्यपाल ने इस अवसर पर चुटकी लेते हुये कहा कि ''कहते हैं कि 64 प्रकार की कलायें होती हैं, पता नहीं 64 कलाओं में राजनीति भी शामिल है कि नहीं। प्रस्ताव करके राजनीति को भी कला में सम्मिलित करिये और उसका पहला पुरस्कार मुझे दीजिये, तो बड़ा अच्छा होगा।''

श्री नाईक ने कहा कि मनुष्य के जीवन में कला का एक विशिष्ट स्थान होता है। केवल दिनचर्या पूरी करने से मनुष्य पूर्ण नहीं होता है। कला से भावनायें अपने आप ऊपर आ जाती हैं। कला की विविधता मनुष्य को मंत्रमुग्ध करती है तथा उससे आनन्द और समाधान प्राप्त होता है। मनुष्य में बुद्धि और विचार है जो मनुष्य को पशु से अलग करती है। भारत में कला की संस्कृति बहुत पुरानी है। कला क्षेत्र में स्थापित होने के लिये कठिन परिश्रम की जरूरत होती है। कठिनाई से हारे नहीं बल्कि परिश्रम से आगे बढे़ क्योंकि परिश्रम का कोई पर्याय नहीं होता। गुरू शिष्य की परम्परा निभाना छात्रों का धर्म है। निरन्तर आगे बढ़ना यानि ''चरैवेति! चरैवेति!!'' ही सफलता का मंत्र है। उन्होंने कहा कि इस परम्परा और संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम नाट्य एवं कला से जुडे़ छात्रों का है।

राज्यपाल ने कहा कि मैं भारतेन्दु हरिशचन्द्र को नमन करता हूँ जिनके कारण हिन्दी नाट्य को नयी दिशा मिली। दुनिया में सबसे ज्यादा जानी जाने वाली यदि कोई भाषा है तो वह हिन्दी है। दीक्षान्त समारोह छात्र की जीवन का महत्वपूर्ण दिन है। किसी भी संस्था की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले का अधिकार होता है कि उसको समय से उपाधि प्राप्त हो। संस्था का यह दायित्व होता है कि जिन्होंने वहाँ से शिक्षा ली जो उन्हें समय पर उपाधि प्रदान की जाये। जिन छात्रों को किन्हीं कारणों से पूर्व में उपाधि नहीं मिल सकी है वे सरकार से वार्ता करके कठिनाई को दूर करने का प्रयास करेंगे। किसी भी छात्र को दिल में यह मलाल नहीं होना चाहिए कि परीक्षा के बाद उसे उपाधि नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि एक अन्य आयोजन करके ऐसे छात्रों को उपाधि प्रदान की जाये।

श्री नाईक ने कहा कि राज्यपाल के नाते वे राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं। पूर्व में विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह समय पर सम्पन्न नहीं होते थे। राज्यपाल रहते हुये उन्होंने कुलपति सम्मेलन बुलाकर प्रयास किया कि प्रवेश से लेकर परीक्षा एवं परीक्षाफल घोषित होकर दीक्षान्त समारोह में उपाधियाँ वितरित करने का कार्य समय से सम्पन्न हो। दो साल में गाड़ी पटरी पर आ गयी है। 26 विश्वविद्यालयों में 2 विश्वविद्यालय के छात्र अभी स्नातक स्तर तक नहीं पहुँचे हैं। शेष 24 विश्वविद्यालयों में से 11 विश्वविद्यालयों में दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हो चुके हैं तथा 27 मार्च, 2017 तक बाकी 13 विश्वविद्यालयों के भी दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हो जायेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसी प्रकार भारतेन्दु नाट्य अकादमी का दीक्षान्त समारोह भविष्य में समय से सम्पन्न होगा।

राज्यपाल ने इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी श्रीमती नादिरा बब्बर, देवेन्द्र राज, सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ, सुशील कुमार सिंह, अतुल श्रीवास्तव, सुरेन्द्र श्रीवास्तव, राघव प्रकाश, सुश्री चित्रा सिंह व अन्य को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। राज्यपाल ने जितेन्द्र मित्तल, सत्य प्रकाश सिंह, अनुपम श्याम सहित अन्य लोगों को भी कला क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु सम्मानित किया तथा छात्रों को उपाधि प्रदान की। राज्यपाल ने इस अवसर पर कलाकारों का आह्वान किया कि वे विधान सभा के चुनाव में मतदाताओं को शत-प्रतिशत मतदान करने के लिये प्रेरित करें।

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