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सरकार बनी तो मायावती मुसलमानों को देंगी आरक्षण

 Avinash |  2017-01-30 14:48:58.0

सरकार बनी तो मायावती मुसलमानों को देंगी आरक्षण


तहलका न्यूज़ ब्यूरो
लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बीजेपी पर आरक्षण-विरोधी मानसिकता के तहत् काम करने व इस मामले में लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुये कहा कि बीएसपी दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़े वर्गों को मिलने वाले लगभग 50 प्रतिशत की आरक्षण में किसी भी प्रकार की कमी व कटौती या इसमें कोई छेड़छाड़ के सख़्त ख़िलाफ है और इसमें कोई बदलाव किये बिना ही 'अपरकास्ट समाज व अल्पसंख्यक समाज' के ग़रीबों को भी आर्थिक आधार पर आरक्षण दिये जाने की पक्षधर है जिसके लिये संविधान में संशोधन करने की माँग अनेकों बार केन्द्र सरकार से करती रही हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा आरक्षण के सम्बन्ध में कल भ्रमित करने वाला इन्टरव्यू दिये जाने पर अपनी प्रतिक्रिया में मायावती ने आज एक बयान में कहा कि शैक्षणिक, सामाजिक व आर्थिक पिछडे़पन के आधार पर दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ों को आरक्षण दिये जाने की व्यवस्था संविधान में प्रावधान के तहत् देश में लागू है, परन्तु आज़ादी के बाद से विभिन्न विरोधी पार्टियों ख़ासकर कांग्रेस व बीजेपी की सरकारों की ग़लत नीयत, नीति व ग़लत कार्यप्रणाली के कारण सर्वसमाज के ग़रीबों अर्थात् अपरकास्ट व अल्पसंख्यक समाज के लोगों में ग़रीबी काफी बढ़ी है। वे ग़रीब लोग भी काफी उपेक्षित व पीड़ित हैं। इसलिए उन्हें उनकी ग़रीबी के आधार पर ना कि उनकी जाति व धर्म के आधार पर आरक्षण की अलग से व्यवस्था किये जाने की ज़रूरत है।

इन वर्गों को आरक्षण दिये जाने के लिये संविधान में संशोधन करके आरक्षण के कोटे को बढ़ाया जा सकता है जिससे दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़े वर्गों को मिलने वाली 50 प्रतिशत की आरक्षण में किसी भी प्रकार की कमी व कटौती या इसमें कोई छेड़छाड किये बिना ही 'अपरकास्ट समाज व अल्पसंख्यक समाज' के ग़रीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है और यह बात बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी अवश्य ही मालूम होनी चाहिये, परन्तु वे जानबूझकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं कि अपरकास्ट व अल्पसंख्यक समाज के ग़रीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिये जाने से दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ों के इस आरक्षण में कटौती हो जायेगी जो कि खासकर चुनाव के दौरान सरासर गलत, मिथ्या व भ्रमित करने वाला प्रचार है।
मायावती ने स्पष्ट किया कि बीएसपी दलितों, आदिवासियों व ओबीसी वर्ग को मिलने वाली लगभग 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ व इसमें कमी व कटौती करने के पूरी तरह ख़िलाफ है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव व कमी एवं कटौती को किसी भी क़ीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।

इसलिये भाजपा के शीर्ष व आरएसएस को आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था व सामाजिक परिवर्तन के मामले में अपना नजरिया व मानसिकता बदलकर देशहित में सही दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है और इसके लिये इनको पहले आरक्षण विरोधी मानसिकता बदल कर इस मामले में समुचित कार्यवाही भी करनी चाहिये। केवल बोलने से अब काम चलने वाला नहीं है, बल्कि इस दिशा में सरकारी स्तर पर खासकर जरूरी कदम भी उठाने होंगे। सरकारी भर्तियाँ समय पर करनी होंगी, नौकरियों में खाली पदों को भरना होगा, सरकारी योजनाओं को अन्धाधुन्ध प्राइवेट सेक्टर में देकर आरक्षण को निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनाने की भी नीतियों में सुधार करना होगा तथा पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को फिर से प्रभावी बनाने के लिये संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित कराना भी सुनिश्चित करना होगा।
इस प्रकार बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को खासकर आरक्षण के मामले में अपनी कथनी व करनी में जमीन-आसमान के अन्तर को मिटाकर सही मानसिकता से काम करना होगा व इन मामलों में भी लोगों को गुमराह करते रहने की नीति व नीयत भी बदलनी होगी।

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