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मायावती ने कहा- BJP की जीत, ईमानदारों की हार है

 2017-03-15 06:26:46.0

मायावती ने कहा- BJP की जीत, ईमानदारों की हार है

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ. बसपा के संस्थापक कांशीराम की आज जयंती है। इस अवसर पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने सुबह लखनऊ के कांशीराम पार्क में लोगों को संबोधित किया। लोगों को संबोधित करते हुए मायावती ने यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में बीजेपी से मिली करारी हार की वजह बताई। मायावती ने कहा 'ये ईमानदारी की जीत नहीं है। ईमानदार लोग भाजपा की जीत को पचा नहीं पा रहे हैं।'

मायावती ने मीडिया को जवाब दिया
मायावती ने कहा कि मीडिया वाले मुझसे पूछ रहे थे कि भाजपा ने पंजाब, गोवा और मणिपुर में ईवीएम मशीन में हेर-फेर क्‍यों नहीं की? ऐसे में मायावती ने जवाब दिया कि यदि भाजपा एंड कंपनी के लोग इन तीनों राज्‍यों में भी ईवीएम में हेर-फेर करते, तो भाजपा की फजीहत हो जाती। इस फजीहत से बचने के लिए भाजपा ने सिर्फ यूपी और उत्‍तराखंड में ईवीएम में हेर-फेर की।

2019 का सपना देख रहे हैं पीएम मोदी
मायावती ने कहा कि यूपी चुनाव जीतने के बाद पीएम मोदी साल 2019 का सपना देख रहे हैं। पीएम मोदी को लगता है कि यूपी का चुनाव जीतकर वे दोबारा दिल्‍ली की सत्‍ता पर काबिज हो सकते हैं। मायावती ने कहा कि पीएम मोदी बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं।

मुसलमानों के इलाके में कैसे जीत गई भाजपा
यूपी विधानसभा चुनाव हारने के बाद मायावती को जो बात सबसे ज्‍यादा खल रही है, वो है मुस्लिम बाहुल इलाकों में भाजपा की जीत। इसी मुद्दे को लेकर 11 मार्च को मायावती ने ईवीएम में हेर-फेर करने का मुद्दा भी उठाया था। मायावती का कहना है कि देवबंद जिले में भाजपा की जीत इस बात की ओर इशारा करती है कि ईवीएम में गड़बड़ी की गई थी। मशीनों में पहले से ही वोट डाल दिए गए थे। बता दें, देवबंद मुस्लिम बाहुल इलाका है और यहां करीब डेढ़ लाख से पौने दो लाख मुस्लिम वोटर हैं।

कौन थे कांशीराम
कांशीराम बसपा के संस्थापक थे। उनका जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब के रुपनगर जिले में एक दलित परिवार में हुआ था। उन्होंने बीएससी की पढ़ाई करने के बाद क्लास वन अधिकारी की सरकारी नौकरी की। आज़ादी के बाद से ही आरक्षण होने के कारण सरकारी सेवा में दलित कर्मचारियों की संस्था होती थी। कांशीराम ने दलितों से जुड़े सवाल और अंबेडकर जयंती के दिन अवकाश घोषित करने की मांग उठाई। 1981 में उन्होंने दलित शोषित समाज संघर्ष समिति या डीएस4 की स्थापना की। 1984 में उन्होंने बीएसपी की स्थापना की थी। कांशीराम मायावती के मार्गदर्शक थे। मायावती ने कांशीराम की राजनीति को आगे बढ़ाया और बसपा को राजनीति में एक ताकत के रूप में खड़ा किया। कांशीराम का 2006 में निधन हुआ था।

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