गोमती तट पर दिलों को जीतने के लिए आये कुमार विश्वास

 2017-04-01 17:43:49.0

गोमती तट पर दिलों को जीतने के लिए आये कुमार विश्वास

अब तो जो भी करना है आरपार करना है

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. राजधानी लखनऊ में गोमती के तट पर हिन्दवी पर्व आज जिस उत्साह से मनाया गया वैसा उत्साह आमतौर पर देखने को नहीं मिलता. मंच पर हिन्दी और उर्दू समान सम्मान के साथ नज़र आयीं. डॉ. कुमार विश्वास की मौजूदगी में रचनाकारों ने जिस खूबी के साथ अपनी रचनाएं पेश कीं उसी सम्मान से शहर-ए-लखनऊ ने भी उन्हें भी रचनाकारों को अपने सर आँखों पर लिया.



कुमार विश्वास के संचालन में हुए इस कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने उत्तर प्रदेश की राजनीति पर करारे तंज़ किये. कुमार ने कहा कि जिस लखनऊ में नवाब वाजिद अली शाह ने ध्रुवपद सुनाया हो उस शहर में पति-पत्नी को प्रेमी-प्रेमिका समझकर पुलिस ने रात-भर थाने में बिठाए रखा, उन्होंने कहा कि मैं उस पति-पत्नी के पैर छूना चाहता हूँ जो शादी के तीन साल के बाद भी प्रेमी-प्रेमिका जैसे नजर आते हैं. कुमार विश्वास ने कहा कि मैं जहाँ खड़ा हूँ ठीक वहीं रिवर फ्रंट के काम की जांच चल रही है. और यहीं इश्क पर पाबंदी लग गई है.



कार्यक्रम के संयोजक क्षितिज कुमार के यह शेर बहुत सराहे गए :-

अब तो जो भी करना है आरपार करना है
या शिकार होना है या शिकार करना है

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दो गज ज़मीन भी अब इंसान छीन लेगा
मुर्दों में खलबली है शमशान बिक रहा है

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ऐसे वर्दी वालों से खाकी शर्मिंदा है
मुजरिम को जो रिश्वत लेकर छोड़ देते हैं.


क्षितिज ने पत्नी के प्रेम में एक छेनी हथौड़ी से पहाड़ काटकर सड़क निकाल देने वाले मांझी के सम्मान में लिखा.

पत्थर न ठहरे प्यार की आंधी के सामने
पर्वत ने सर झुका दिया मांझी के सामने




आलोक श्रीवास्तव ने सुनाया :-

सखी पिया को जो मैं न देखूं
तो कैसे काटूं अंधेरी रतियाँ,
कि जिनमें उन्हीं की रौशनी हो
कहीं से ला दो मुझे वह अँखियाँ.

वत्सला पाण्डेय को कुमार ने बुलाया तो कहा कि उन्हें वत्सला में नेता बनने के गुण नज़र आते हैं. वत्सला ने पलटवार करते हुए कहा कि मैंने खांसना सीख लिया है. कुमार ने कहा जैसे ही पूरी तरह सीख लेंगी मैं शपथ दिला दूंगा.
वत्सला ने सुनाया :-
एक प्याली चाय
अगर दोस्तों के साथ हो
तो गप्पें हो जाती हैं.
नाते रिश्तेदारों के साथ हों
तो मसले हल हो जाते हैं
और
तुम्हारे साथ हो
तो दिन भर की चिंता दूर हो जाती है.



हरदोई से आये युवा रचनाकार गौरव मासूम ने सुनाया :-
सजा ये है कि नींदें छीन लीं दोनों की आँखों से
खता ये है कि हम दोनों ने मिलकर ख़्वाब देखा था.

वरिष्ठ रचनाकार राम प्रकाश बेखुद और खुद कुमार विश्वास ने देर रात तक समा बांधे रखा.

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