काल मार्क्स के विचारों को अधूरा मानते थे डॉ. लोहिया

 2017-03-23 14:45:40.0

काल मार्क्स के विचारों को अधूरा मानते थे डॉ. लोहिया

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयन्ती के अवसर पर लोहिया पार्क स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके तथा उनके चित्र पर माल्यार्पण करके अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

राज्यपाल ने आदरांजलि देने के पश्चात पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि वह डॉ. राम मनोहर लोहिया को करीब से जानते हैं. मुंबई में रहते हुये उनके समाजवादी विचारधारा के वरिष्ठ नेताओं से अच्छे संबंध थे. डॉ. लोहिया का अनेक विदेशी भाषाओं पर प्रभुत्त था, लेकिन उनका मत था कि हिन्दी व क्षेत्रीय भाषाओं का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग हो. मुंबई में समाजवादी नेताओं के साथ मिलकर उन्होंने भारतीय भाषाओं के विकास के लिये आयोजन किया था, जिसमें लोहिया जी स्वयं उपस्थित थे. कई बार लोहिया जी को मिलने और सुनने का मौका मिला. राज्यपाल ने डॉ. लोहिया के कथन 'लोग मेरी बात सुनेंगे जरूर, लेकिन मेरे मरने के बाद' को उद्धृत करते हुये कहा कि यह वाक्य उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है. वे एक दार्शनिक थे. डॉ. लोहिया काल मार्क्स के विचारों को अधूरा मानते हुये कहते थे कि उसे भारतीय पृष्ठभूमि से जोड़ने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया के जीवन आदर्शों व सिद्धांतों से प्रेरणा प्राप्त करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

श्री नाईक ने कहा कि डॉ. लोहिया एक प्रसिद्ध समाजवादी विचारक, लेखक, भाषाकार, अर्थशास्त्री एवं मौलिक चिन्तन करने वाले दार्शनिक थे. वे विपक्षी एकता के सूत्रधार थे. कांग्रेस के विरोध मंल उन्होंने सभी विपक्षी दलों को एकजुट किया. चित्रकूट में रामायण मेला का शुभारम्भ करने की कल्पना डॉ. लोहिया द्वारा की गयी थी. समाज में काम करते हुये सबको जोड़ना, विचारों को व्यवहार में उतारना तथा वैचारिक शुद्धता उनकी विशेषता थी. राज्यपाल ने कहा कि उनका मानना है कि सभी महापुरूषों का सम्मान होना चाहिये. इस दृष्टि से वे प्रयास करते हैं कि ऐसे सभी महापुरूषों की जयंती एवं पुण्यतिथि पर उनके स्मारक पर जाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें. डॉ. लोहिया केवल पार्टी विशेष के नेता नहीं थे. उन्होंने कहा कि डॉ. लोहिया का व्यक्तित्व राष्ट्रीय था.

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