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भाऊराव देवरस ने समाज के सामने सेवा का उदाहरण रखा : राज्यपाल

 2017-03-28 16:48:54.0

भाऊराव देवरस ने समाज के सामने सेवा का उदाहरण रखा : राज्यपाल


21वीं सदी सेवा को समर्पित सदी है : कप्तान सिंह सोलंकी

लखनऊ. भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा माधव सभागार में आयोजित 22वें भाऊराव देवरस सेवा स्मृति सम्मान समारोह में मिजोरम के पुईथियम पु.बी. लालथ्लेन्गलियाना तथा चेन्नई के एम.ए. बालासुब्रह्मण्यम को उनकी सेवाओं के लिये सम्मानित किया गया. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी तथा डॉ. कृष्ण गोपाल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे.

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि स्वर्गीय भाऊराव देवरस एक कर्मयोगी थे जिन्होंने समाज के सामने सेवा का एक उदाहरण रखा. उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में काम किया तथा उनमें दूसरों को प्रेरित करने की अद्भुत शक्ति थी. उनके मन में समाज को संगठित करने तथा समरस बनाने की प्रबल इच्छा थी. इसके साथ ही उनमें समाज के निर्बल, पिछडे़, वनवासियों एवं पीड़ित व्यक्तियों के प्रति अपार मानवीय करुणा थी. भाऊराव देवरस ने समाज के सामने सेवा का उदाहरण रखा. उन्होंने कहा कि स्वर्गीय भाऊराव देवरस से उनका नजदीक का परिचय था.

श्री नाईक ने भाऊराव देवरस सेवा न्यास की सराहना करते हुये कहा कि न्यास विशाल दृष्टि रखता है और उसी दृष्टि से मिजोरम व तमिलनाडु के सेवाव्रतियों को सम्मानित किया गया है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सामने लाने की जरूरत है ताकि उनसे प्रेरणा प्राप्त करके समाज में सेवाभाव का उद्भव हो. राज्यपाल ने अपने विवेकाधीन कोष से भाऊराव देवरस सेवा न्यास को 7.5 लाख रुपये तथा कुष्ठ पीड़ितों के लिये रहने योग्य आवास बनाने के लिये सेवा समर्पण संस्थान मोहनलालगंज लखनऊ को 9 लाख रूपये देने की घोषणा की.

हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने भाऊराव देवरस सेवा न्यास को 25 लाख रूपये देने की घोषणा के साथ कहा कि 21वीं सदी सेवा को समर्पित शताब्दी है. सेवाभाव से सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है. प्रजातंत्र में जनता का भला शासन करने से नहीं सेवा करने से होता है. सत्ता शासन करने के लिये नहीं बल्कि सुशासन एवं सेवा करने के लिये मिलती है. जन सेवा ही सफलता का मूल मंत्र है. उन्होंने कहा कि सेवा का सम्मान करने से दूसरों को प्रेरणा मिलती है.

डॉ. कृष्ण गोपाल ने भाऊराव देवरस के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि वे लखनऊ के विद्यार्थी रहे. कार्यकर्ताओं को प्रेरणा देने के साथ-साथ उन्होंने संघ का विस्तार भी किया. पं. दीनदयाल को भी उनका सानिध्य प्राप्त था. समाज के सम्पन्न लोग जरूरतमंदों की मदद करें. उन्होंने कहा कि बांटकर गुजारा करना ही यज्ञ है.

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