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साइकिल न मिलनेे पर इस सिंबल से चुनाव लड़ सकते हैं मुलायम

 Girish |  2017-01-12 08:48:12.0

साइकिल न मिलनेे पर इस सिंबल से चुनाव लड़ सकते हैं मुलायम

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के दो फाड़ होने के बाद अब चुनाव चिन्‍ह साइकिल पर कब्जे की लड़ाई चल रही है। मुलायम और अखिलेश खेमे दोनों ही चुनाव आयोग में साइकिल चुनाव चिह्न पर दावा जता चुके हैं। जानकारों की माने तो अगर दोनों खेमो में सुलह नहीं हुई तो चुनाव आयोग 13 जनवरी को साइकिल पर कोई भी फैसला आने तक इस सिंबल को फ्रीज कर सकता है। साथ ही दोनों खेमों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह आवंटित कर सकता है।


इस बीच मुलायम और अखिलेश दोनों की खेमों ने साइकिल के फ्रीज हो जाने की संभावना को देखते हुए
वैकल्पिक सिंबल का इंतजाम कर लिया है। एक तरफ अखिलेश बरगद या मोटरसाइकिल के सिंबल के साथ चुनाव मैदान में कूदने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, पिता मुलायम सिंह यादव वापस उसी चुनाव चिन्ह की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं, जिसने उन्हें 80 के दशक में यूपी की राजनीति में केंद्र बिंदु बनाया।


सूत्रों की माने तो मुलायम सिंह यादव ने 'खेत जोतता किसान' पर अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। मुलायम खेमे ने चरण सिंह की पार्टी लोकदल के संपर्क किया है। वहीं लोकदल के अध्यक्ष सुनील सिंह से मुलायम-शिवपाल ने बातचीत की है।

इस दौरान चौधरी सुनील सिंह ने मुलायम सिंह यादव को लोकदल का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की पेशकश की है। उन्‍होंने कहा कि अखिलेश का राष्ट्रीय अधिवेशन अलोकतांत्रिक था। बिना राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुमति के ऐसा नहीं किया जा सकता।


बता दें कि लोकदल के
अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह सपा से एमएलसी है। लोकदल की स्थापना 1980 में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने की थी। लोक दल में चौधरी चरण सिंह के साथ-साथ हेमवंती नंदन बहुगुणा, देवी लाल, मुलायम सिंह यादव, नितीश कुमार, कर्पूरी ठाकुर, शरद पवार, राजेंद्र सिंह, राम विलास पासवान, जॉर्ज, विजय पटनायक, बेनी वर्मा क़ाज़ी रशीद मसूद आदि भी इसमें शामिल रहे है।



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