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उप्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में 'चिया' व 'किनवा' की खेती को मिलेगा बढ़ावा

 Sabahat Vijeta |  2016-07-14 14:10:38.0

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लखनऊ. बुंदेलखड, मिर्जापुर और प्रदेश के अन्य सूखा क्षेत्रों में अब हरियाली आने वाली है। इससे किसानों को अधिक लाभ मिलने से संजीवनी तो मिलेगी ही, परंपरागत खेती से होने वाला घाटा भी नहीं होगा। चिया और किनवा की खेती से सूखा क्षेत्र के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास सरकार ने तेज कर दिया है। मैक्सिकन और दक्षिणी अमेरिका में होने वाली चिया और दक्षिण अफ्रीका की फसल किनवा की खेती न सिर्फ रबी और खरीफ दोनों सीजन में उगाया जा सकता है बल्कि इसमें स्वास्थ्यवर्धक गुण भी हैं।


तुलसी प्रजाति की इन फसलों के बाजार भाव भी अधिक हैं। कम लागत में ही किसान अधिक लाभ कमायेंगे। महज 8 से 10 हजार रुपये की लागत से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ का लाभ मिलेगा।


इन 'पानी मि़त्र' फसलों की दो-तीन सिंचाई ही पर्याप्त है। इससे सूखाग्रस्त क्षेत्रों की परंपरागत खेती से होने वाले घाटे कम होंगे। ऐसे में इनके सेवन से किसान परिवारों के बच्चों और बूढ़ों में कुपोषण का खतरा टल जाता है।


चिया हृदय तथा कोलेस्ट्रॉल संबंधी बीमारी से बचाता है तो किनवा ब्लडप्रेशर को रोकने में सक्षम है। इनके अलावा भी इन फसलों में बहुत से स्वास्थ्यवर्धक गुण हैं। स्टेट लेबल नोडल एजेंसी (एसएलडीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आंजनेय सिंह ने बताया, "हम बुंदेलखंड समेत प्रदेश के 20 जिलों में किनवा की खेती कर रहे हैं। परंपरागत खेती से दो गुना उत्पादन मिल रहा है। किसान काफी हद तक संतुष्ट हैं।"

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