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RES ने SC के ORDER का तोड़ निकाला , दो-दो प्रमुख सचिव कुर्बान

 Tahlka News |  2016-05-18 15:16:57.0

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- विवादित अफसर को फिर बैठाया कुर्सी पर

- मंत्री की मनचाही न करने पर दो प्रमुख सचिव हटाए गए

- मंत्री के बेटे ने भी विवादित अफसर के लिए किया हंगामा

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ। यूपी सरकार के सब अड़चनों का इलाज है। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन  में आरक्षण पर रोक लगाई। यूपी सरकार ने अधिकारियों के डिमोशन कर दिए। लेकिन इस आदेश की चर्चा शांत पड़ते ही डीमोट किए गए अफसर को वापस रूरल इंजीनियरिंग सर्विसेज के डायरेक्टर पद पर बैठा दिया। यही नहीं पिछले छह महीने से इस पोस्ट का कार्यभार देख रहे अफसर के सिग्नेचर के बिना ही आदेश भी पारित कर दिया गया। इसके लिए न केवल दो-दो प्रमुख सचिवों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी बल्कि इस विभाग के मंत्री के बेटे ने बाकायदा फ़ोन करके इस अफसर को वापस डायरेक्टर बनाए जाने की पैरवी की।


सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बाद हटा दिया था

दरअसल, सारा विवाद उत्तर प्रदेश सरकार के रूरल इंजीनियरिंग सर्विसेज (ग्रामीण अभियंत्रण सेवा) के डायरेक्टर के पोस्ट को लेकर है। जिस पर 9 सितम्बर , 2015 तक उमा शंकर सिंह डायरेक्टर और चीफ इंजिनियर के पद पर तैनात थे। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कि प्रमोशन में किसी तरह का रिजर्वेशन लागू नहीं होगा, सरकार ने इन्हें डिमोट करते हुए वापस सुप्रिडेंटिंग इंजिनियर बना दिया। उमाशंकर सिंह के साथ ही डिपार्टमेंट के 5 अन्य इंजिनियर्स को भी डिमोट कर दिया गया। इसके एक दिन बाद यानि 10 सितम्बर, 2015 को राम प्रकाश सिंह जो की सुप्रिडेंटिंग इंजिनियर के पद पर तैनात थे और चीफ इंजिनियर की पोस्ट का कार्यभार देख रहे थे, उन्हें डायरेक्टर के पोस्ट का कार्यभार भी दे दिया गया।

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हटने के बाद फिर डायरेक्टर बनने के लिए दो प्रमुख सचिवों को हटवाया

सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बाद डायरेक्टर पद से हटे उमा शंकर सिंह को अपनी कुर्सी से इतना लगाव था कि वे इसके बिना बेचैन रहें लगे। पार्टी कार्यालय से लेकर मंत्री तक के घर के चक्कर लगा दिए। उनकी इस मशक्कत को देखकर मंत्री जी का दिल पसीज गया। लेकिन राह में रोड़ा था सुप्रीम कोर्ट का आर्डर। मजबूरन पहले एक प्रमुख सचिव ने इस कागज़ पर सिग्नेचर करने से माना कर दिया। नतीजा हुआ कि प्रमुख सचिव महोदय इस विभाग से चलते कर दिए गए। उनकी जगह आये दूसरे प्रमुख सचिव ने भी जब इस पर आपत्ति जताई तो उनका भी यही हश्र हुआ।

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काम न बनता देख, निकाला बीच का रास्ता

उमा शंकर सिंह को वापस डायरेक्टर बनाने के लिए न केवल मंत्री जी लगे थे बल्कि उनका पूरा कुनबा इस मिशन में जुटा था। दो-दो प्रमुख सचिवों की आपत्ति और कुर्सी की कुर्बानी देखकर। मामला बिगड़ता देख एपीसी (एग्रीकल्चर प्रोडक्शन कमिश्नर) ने बीच का रास्ता निकाला। हालात यह हैं कि 16 मई को महेश गुप्ता को आरईएस का नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया लेकिन उनके कार्यभार सम्हालने से पहले ही एपीसी ने मामले में सीधे दखल देते हुए आनन फानन में डायरेक्टर का चार्ज उमा शंकर सिंह को दे दिया।

 फुल टाइम नहीं तो इंचार्ज ही सही

एपीसी ने उमा शंकर सिंह को वापस डायरेक्टर की कुर्सी पर बैठाने के लिए उन्हें 17 मई, 2016 को अपने सिग्नेचर से एक आर्डर जारी कर दिया। इसके मुताबिक़ अब आरईएस के नए इंचार्ज उमा शंकर सिंह होंगे। दिलचस्प बात यह है कि इस आदेश पर एपीसी प्रवीर कुमार और उमाशंकर सिंह के सिग्नेचर तो हैं लेकिन इस डायरेक्टर की पोस्ट के इंचार्ज का काम देख रहे राम प्रकाश सिंह के नाम के आगे सिर्फ एक तिरछी लकीर खिंची पड़ी है।

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विवादित रहे हैं उमाशंकर सिंह, उम्र छिपाने का आरोप

जिन उमाशंकर को पहले डिमोट कर जुगाड़ से डायरेक्टर बनाया गया है, उन पर न केवल करप्शन का आरोप है बल्कि उनके ऊपर अपनी उम्र छिपाने का भी आरोप लग चुका है और जांच में यह बात साबित हो चुकी है। मामल बसपा सरकार का है साल 2008 में इन्हीं उमाशंकर सिंह ने एप्लीकेशन देकर अपनी उम्र गलत तरीके से चेंज करवाई। रिकार्ड में उनकी जन्मतिथि 25 अक्टूबर 1951 दर्ज थी। इस हिसाब से उन्हें अक्टूबर 2011 में रिटायर होना था, लेकिन अक्टूबर 2008 में उन्होंने आवेदन दिया कि उनकी जन्म तिथि 25 अक्टूबर 1951 नहीं बल्कि 1957 है। जून 2009 में सरकार ने उनकी डेट ऑफ़ बर्थ उनकी एप्लीकेशन के अनुसार 25 अक्टूबर 1957 मानते हुए इसका शासनादेश जारी कर दिया।

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