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माया का दावा : यूपी में बनायेंगे पूर्ण बहुमत की सरकार

 Sabahat Vijeta |  2016-03-19 14:10:04.0

mayavatiनई दिल्ली, 19 मार्च. हाल ही में आये एक ओपिनियन पोल के बाद बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि 2017 में वे एक मर्तबा फिर पूर्ण बहुमत की सरकार बनायेगी. उन्होंने कहा कि यूपी के पंचायत चुनाव में बीएसपी नम्बर एक की पार्टी रही और विधानसभा चुनाव में इससे बेहतर नतीजे लायेगी. मायावती ने शनिवार को देश भर से आये पार्टी के चुनिन्दा प्रतिनिधियों के साथ दिल्ली में बैठक की लेकिन खास फोकस उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर रहा. मायावती ने भाजपा और आरएसएस पर हल्ला बोलते हुए कहा कि सर्वसमाज को साथ जोड़ते हुए वे राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकती हैं.


मायावती ने बीएसपी के केन्द्रीय कार्यालय में आयोजित, पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी व विभिन्न राज्यों से आये वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं उन राज्यों में तैनात केन्द्रीय संयोजकों से, उनके राज्यों के पार्टी संगठन की तैयारी व सर्वसमाज में जनाधार को बढ़ाने के सम्बन्ध में विस्तार से प्रगति रिपोर्ट ली। साथ ही पार्टी के दिशा-निर्देंशानुसार पूरे तौर से सही काम करने वालों को सराहा व उसमें कमी पाये जाने वाले राज्यों को आवश्यक सुधार लाने का निर्देंश देते हुये उन्हें आगे ज़रूरी क़दम उठाये जाने की संभावना की चेतावनी भी दी।


उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु आदि राज्यों में विधानसभा के आमचुनाव हो रहे हैं। इन राज्यों में पार्टी ज़मीनी स्तर पर लगातार काम कर रही है, परन्तु वहाँ कुछ रिज़ल्ट पाने में थोड़ा समय लग सकता है। फिर भी जो लोग पार्टी की मानवतावादी विचारधारा से जुड़े हैं उनके व पार्टी हित को ध्यान में रखकर बी.एस.पी. ने उन राज्यों में अकेले ही अपने बल पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इन राज्यों के पदाधिकारियों के अनुरोध पर मायावती ने पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभा को सम्बोधित करने के हेतु कार्यक्रमों को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को छोड़कर देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को लेकर अनवरत चल रहा बी.एस.पी. का जि़ला-स्तरीय धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम जारी रहेगा।


सुश्री मायावती ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में जहाँ विरोधी पार्टियों की और ख़ासकर भाजपा व कांग्रेस की सरकारें हैं वहाँ पर दलित समाज व अन्य कमज़ोर वर्ग के लोगों के विरूद्ध अन्याय-अत्याचार आम बात हो गयी है, क्योंकि वहाँ की सरकारें अपनी संवैधानिक जि़म्मेदारियों को नहीं निभाकर जातिवादी मानसिकता से काम कर रही है। उन वर्गों के वोट की ख़ातिर केवल जुबान से ही दलित व अन्य पिछड़े वर्गों में समय-समय पर जन्में महान सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों में से ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फूले, छत्रपति शाहूजी महाराज, नारायणा गुरु, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व कांशीराम आदि का नाम लिया जाता है जबकि इन्हीं लोगों ने उन महापुरुषों का आजीवन बुरी तरह से विरोध किया व उनका तिरस्कार भी किया और इनका यह जातिवादी बुरा रवैया उनके अनुयाइयों के साथ देशभर में आज भी लगातार जारी है।


उत्तर प्रदेश विधानसभा आमचुनाव के सम्बन्ध में आये ताज़ा ’’ओपिनियन सर्वें’’ का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता ने बी.एस.पी. को नम्बर-एक की पार्टी बनाकर उभारा है। उसके मद्देनज़र रखते हुये बी.एस.पी. को इस बार यहाँ विधानसभा आमचुनाव में जरूर स्पष्ट बहुमत मिलेगा।


वैसे उत्तर प्रदेश के अगले विधानसभा आमचुनाव में जहाँ अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के साथ-साथ जनहित व विकास के मामले में हमारी पार्टी का बेहतरीन रिकार्ड जनता को अच्छी तरह से याद है, वहीं वर्तमान सपा सरकार में हर स्तर पर उत्पन्न भ्रष्टाचार, जंगलराज व अराजकता का माहौल एवं भाजपा की जातिवादी, धार्मिक संर्कीणता व जनविरोधी राजनीति के कारण जान-माल की सुरक्षा व शान्ति-व्यवस्था का लगातार बिगड़ता माहौल लोगों को इन विरोधी पार्टियों से विमुख होने को मजबूर कर रहा है। उत्तर प्रदेश में हमारी पार्टी सर्वसमाज के हित में ‘‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय‘‘ की पहले से ज़्यादा बेहतर सरकार देगी, ऐसा हमारा संकल्प व आमजनता से वादा है।


इसके साथ ही, इस मौके पर पार्टी प्रमुख मायावती ने आज यह भी कहा कि कुछ मुठ्ठीभर धन्नासेठों व बड़े-बड़े पूँजीपतियों को छोड़कर, देश के लगभग सवा सौ करोड़ लोगों में से ख़ासकर करोड़ों गरीबों, मज़दूरों, किसानों व छोटे व्यापारियों आदि के ‘‘अच्छे दिन‘‘ लाने की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेरने के साथ-साथ उन पर महँगाई व टैक्स आदि का बोझ बढ़ाने व अनेक प्रकार की नई-नई अन्य मुसीबतें थोपने से उत्पन्न व्यापक जनाक्रोश पर से लोगों का ध्यान हटाकर उन्हें गुमराह करने के लिये केन्द्र की भाजपा सरकार व उनकी समस्त सहयोगी संगठनें तरह-तरह से धार्मिक कट्टरवाद, आपसी घृणा व छद्म राष्ट्रवाद के संकीर्ण गैर-जनहित के मुद्दों को भड़काने का काम कर रही है, जिससे आमजनता को देशहित में बहुत ही सावधान रहने की जरूरत है।


इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार अपने पैतृक संगठन आर.एस.एस. की संकीर्ण व जातिवादी विचारधारा पर चलते हुये भारत को ‘‘हिन्दू राष्ट्र‘‘ बनाने के क्रम में, जनहित व देशहित को पूरी तरह से त्याग कर ग़रीबी, बेरोज़गारी, महँगाई व अमनचैन जैसे ज़रूरी मुद्दों को पूरी तरह से भुला बैठी है।


इसका मक़सद समाज के हर वर्ग को छलना, तनाव में उलझाना व उसके संवैधानिक हक़ों को छीनना या फिर उसे शिथिल बना देना है। महँगाई घटाने, ज़्यादा से ज़्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने, लोगों को अमनचैन से रहने व काम करने देने आदि के मामले में केन्द्र की भाजपा सरकार अपने अब तक के शासनकाल में पूरी तरह से विफल साबित होती हुई लगती है। इसी कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की लोकप्रियता आयेदिन घटती ही जा रही है और मोदी के बार-बार के आह्वान के बावजूद भी भाजपा व आर.एस.एस. के लोग आमजनता से आँख मिलाकर बात नहीं कर पा रहे हैं।


केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा उसके लगभग पौने दो वर्ष के कार्यकाल में भ्रष्टाचार को अप्रत्यक्ष तौर पर काफी बढ़ावा देने व भ्रष्टाचार के गम्भीर मामलों जैसे ललित मोदी काण्ड, मध्य प्रदेश का व्यापम खूनी महाघोटाला व अब विजय माल्या का 9,000 करोड़ रुपये का बैंक फ्राड केस आदि मामलों में भ्रष्टाचारियों को सीधे तौर पर सरकारी संरक्षण देने का इल्ज़ाम लगाते हुये उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपने कृपालू धन्नासेठों व पूँजीपतियों के लिये पूरी तरह से सात ख़ून माफ किये हुये हैं।


इस प्रकार कांग्रेस के ‘‘प्रत्यक्ष भ्रष्टाचार‘‘ की तरह ही भाजपा का ‘‘अप्रत्यक्ष भ्रष्टाचार‘‘ आजकल विश्व स्तर पर भी काफी चर्चाओं में है। कुल मिलाकर कांग्रेस व भाजपा हर मामले में एक ही थैली के चट्टे-बट्टे साबित हो रहे हैं। वैसे जिस प्रकार से भाजपा की सरकार भ्रष्टाचारियों व कालाधन रखने वालों को संरक्षण देकर उनको बचाने का काम कर रही है, उससे संभव है कि अगले कुछ वर्षों के अन्दर भाजपा कांग्रेस के भ्रष्टाचार से भी आगे ना निकल जाये। अपने इस प्रकार के कृत्यों को छिपाने के लिये भाजपा यह दावा करती रहती है कि कांग्रेस ने भी काफी भ्रष्टाचार किये हैं, जो इनका यह गैर-जिम्मेवाराना जवाब है।


’’देशहित की नीति’’ से ज़्यादा ’’संकीर्ण व द्वेष की राजनीति’’ से काम करने का भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुये मायावती ने कहा कि केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. सरकार लोगों का हक छीनने वाली सरकार बनती जा रही है। पहले इस सरकार ने समाज के एक बहुत बड़े वर्ग दलितों व पिछड़ों आदि को नौकरी व शिक्षा में आरक्षण के संवैधानिक हक को निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनाकर उनसे उनका यह कानूनी अधिकार छीनने का प्रयास किया, फिर धार्मिक अल्पसंख्यकों में से खासकर मुस्लिम समाज के लोगों को उनके विभिन्न संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने का काम किया। फिर किसानों से उनकी भूमि छीनने का ज़ोरदार परन्तु असफल प्रयास किया गया और अब देश के करोड़ों ग़रीबों, मज़दूरों एवं निम्न व मध्यम आय वाले लोगों को सस्ती दर में मिलने वाले खाद्यान्न व रसोई गैस आदि को ‘‘आधार नम्बर‘‘ से ज़बर्दस्ती जोड़कर उन्हें इससे वंचित करने का काम किया जा रहा है। बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों के खि़लाफ सरकारी धन व देश की सम्पत्ति लूटने पर भी कोई सख़्त क़ानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है, बल्कि इसके विपरीत उन्हें बचाने के लिये केन्द्र की सरकार नित्य दिन नये-नये बहाने गढ़ती रहती है। लोगों के सामने यह सवाल है कि क्या यही भाजपा का जनहित व देशहित है जिस वायदे पर वे बहुमत के साथ सत्ता में आये है?

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