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बुन्देलखंड की इस विधानसभा सीट से चुनाव लडेंगे सीएम अखिलेश यादव !

 Girish Tiwari |  2016-12-26 06:45:49.0

akhilesh-bundelkhand


तहलका न्‍यूज ब्‍यूरोे


लखनऊ: कुछ दिनों पहले जब यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड से विधान सभा चुनाव लड़ने के संकेत दिए थे तब यह माना गया था कि अखिलेश बुंदेलखंड में किये गए अपने कामो को मुद्दा बनाना चाहते हैं और अब ऐसी खबरे आ रही है कि अखिलेश ने अपने लिए बुन्देखंड की एक मुफीद सीट चुन ली है.


यूपी के सीएम अखिलेश यादव बुंदेलखंड से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। सूत्रों की माने तो अखिलेश ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को 403 कैंडिडेट की जो लिस्‍ट दी है, उसमें उन्‍हें झाँसी के बबीना से प्रत्याशी बनाया गया है। इससे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।


इस सीट पर अभी बीएसपी का कब्ज़ा है। समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि सीएम ने बुंदेलखंड के विकास के लिए काफी अच्छा काम किया है। लिहाज़ा सीएम को बुंदेलखंड के लोग भारी बहुमत से जीताकर विधानसभा भेजेंगे।

बुंदेलखंड में समाजवादी पार्टी कभी भी बहुत प्रभावी नहीं रही और वहां की नदियों में अवैध खनन ने भी अखिलेश सरकार के दामन पर कई बार छींटे उछाले. विपक्ष ने भी इसे बड़ा मुद्दा बनाया था. मगर सूखे की मार से कराह रहे बुंदेलखंड के तालाबो को पुनर्जीवित करने के काम ने अखिलेश यादव की लोकप्रियता बढा दी. इस बीच सूखे के बीच तत्काल रहत के लिए भी अखिलेश सरकार ने वहां के गाँव में राहत सामग्री का वितरण बड़े पैमाने पर कराया. बीते गर्मियों में जिस वक्त बुंदेलखंड का सूखा एक बड़ा मुद्दा बन गया था उस समय केंद्र द्वारा पानी की ट्रेन भेजने पर भी बड़ी सियासत हुयी थी. अखिलेश यादव ने दावा किया था कि केन्द्र ने पानी की बजाए खाली टैंकर भेज दिए थे.

बबीना झांसी जिले में आता है और इस इलाके में यादव मतदाता बड़ी संख्या में हैं. ऐसे में अखिलेश यादव ने इस सीट को चुन कर एक तरफ तो बुंदेलखंड में अपने कामो को मुद्दा बनाया है वही जातीय समीकरणों को भी ध्यान में रखा है.

इसके अलावा बीते 15 नवम्बर को जब अखिलेश बुंदेलखंड के दौरे पर थे उस वक्त बांदा जिले के बबेरू के विधायक ने भी उन्हें अपनी सीट से चुनाव लड़ने का आग्रह किया था. यह सीट भी दलित और यादव बहुल सीट मानी जाती है. वामपंथी आंदोलन के दौरान पहले यहां से कामरेड दुर्जन भाई (दलित) दो बार विधायक हुए, इसके बाद कामरेड देव कुमार यादव तीन बार विधायक चुने गए. इस सीट में दलित और यादव गठजोड़ की बदौलत जागेश्वर यादव भाकपा से सांसद भी निर्वाचित हुए थे. मगर बाद में यह बसपा का गढ़ बन गया और वर्तमान में विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता गया चरण दिनकर यहाँ से तीन बार विधायक हुए. मगर 2007 में यह सीट समाजवादी पार्टी ने छीनी और तबसे सपा के विश्वंभर सिंह यादव ही विधायक हैं.

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