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यूपी चुनाव: 'मायावती की असली लड़ाई राम से है'

 Abhishek Tripathi |  2016-08-16 04:33:43.0

mayawati_lord_ramaअभिषेक त्रिपाठी
लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती के कई भरोसेमंद उन्हें धोखा देकर दूसरी पार्टी में शामिल हो चुके हैं। दूसरी पार्टी को ज्वाइन करने वाले नेताओं ने मायावती पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। लखनऊ गालीकांड में भी बसपा को मुंह की खानी पड़ी। इसके बाद भी मायावती के हौसले बुलंद हैं। अगले कुछ महीनों में यूपी चुनाव है। ऐसे में राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि यूपी चुनाव मायावती की लड़ाई सीधे राम से है। ये वही राम हैं जिनके खिलाफ मायावती एक बार विवादित टिप्पणी भी कर चुकी हैं। चर्चा है कि यूपी का सवर्ण और क्षत्रिय वर्ग मायावती से नाराज है और मायावती को इनसे काफी नुकसान हो सकता है।


बता दें कि अंबेडकर की 125वीं जयंती पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बयान दिया था कि हमारे मसीहा अंबेडकर हैं, राम नहीं। मायावती के इस बयान से यूपी में जो सवर्ण वर्ग है, वह उनसे अलग हो गया। इसके साथ ही मायावती ने अपने इस बयान से दलित वोट बैंक को भी पक्का करने का काम किया था। अब चूंकि यूपी चुनाव नजदीक है तो कहा जा रहा है कि मायावती को सवर्ण वर्ग सबक सिखाएंगे। ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि मायावती की लड़ाई सिर्फ राम से है। अब देखते हैं कि कौन जीतता है?


बसपा ने हिंदुत्व को ललकारा है
मायावती समेत कई बसपा नेता हिंदुत्व को खुलेआम ललकार चुके हैं। हालांकि, ऐसा सिर्फ वोट बैंक के लिए ही किया गया। यूपी के लोगों की मानें तो राम उनके ईष्ट हैं और उनके खिलाफ कोई अमर्यादित टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसका सीणा जवाब उन्हें यूपी चुनाव में दिया जाएगा। वहीं, बीजेपी में शामिल हो चुके बसपा के बागी नेता स्वामी प्रसाद मौर्या भी हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी कर चुके हैं।


2007 में मायावती ने 86 ब्राह्मणों को दिया था टिकट
माना जाता है कि सूबे की सत्ता में माया को लाने के लिए सवर्ण वर्ग का बड़ा योगदान रहा है। साल 2007 के यूपी विधानसभा चुनावों में मायावती ने 86 ब्राह्मणों के साथ 45 क्षत्रियों को टिकट दिए। चुनाव में मायावती पूर्णबहुमत के साथ विजयी रहीं।

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