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बाबासाहेब के सपनों के अनुरूप विश्वविद्यालय का विकास हो

 shabahat |  2017-01-09 11:02:07.0



लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के 21वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की 21 साल की यात्रा पर आधारित लघु वृतचित्र भी प्रस्तुत किया गया. इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलाॅजी संस्थान के भवन का लोकार्पण किया एवं कुलपति डाॅ. आर.सी. सोबती सहित अन्य सहयोगियों द्वारा रचित पुस्तक ‘ओरिजनल थाॅटस एण्ड स्पीचेज आफ बाबासाहेब डाॅ. बी.आर. अम्बेडकर’ का विमोचन भी किया. कार्यक्रम में पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. आर.के. कोहली, एच.सी. गनेशिया, कुलपति के सलाहकार प्रो. आर.बी. राम, शिक्षकगण, छात्र-छात्राओं सहित गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे. इससे पूर्व राज्यपाल ने बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी.

राज्यपाल ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि यह विश्वविद्यालय डाॅ. अम्बेडकर के नाम पर स्थापित है, इसलिये उनके सपनों के अनुरूप इसका विकास होना चाहिए. 21 वर्ष की यात्रा में सिंहावलोकन एवं आत्ममंथन का कार्य करें. यह विश्लेषण करने की जरूरत है कि जो लक्ष्य निर्धारित किये गये थे उस पर कहाँ तक पहुँचे हैं और भविष्य में क्या करना है. हमें ऐसे भावी नागरिक तैयार करने चाहिए जो विचारशील हों और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें. उन्होंने कहा कि जनशक्ति की उपलब्धता की दृष्टि से हमारे देश में युवाओं की संख्या हमारे लिये बहुत उपयोगी है.


श्री नाईक ने बाबासाहेब के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि उन्हें बाबासाहेब को कई अवसरों पर देखने और सुनने का सौभाग्य प्राप्त है. बाबासाहेब की सोच मूलगामी थी. गहन चिंतन के बाद वे अपने विचार रखते थे जो समाज के लिये मार्गदर्शक होते थे. बाबासाहेब ने कठिनाई का सामना करते हुये शिक्षा ग्रहण की. देश के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुये उन्होंने जनतंत्र चलाने की दृष्टि से योग्य संविधान बनाया. बाबासाहेब शिक्षा के पक्षधर थे. राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुये बताया कि मराठवाडा विश्वविद्यालय के नाम में बाबासाहेब का नाम जुड़वाने के लिये उन्होंने कैसे सत्याग्रह किया था. उन्होंने कहा कि डाॅ. अम्बेडकर के सपनों को आगे बढ़ाने की जरूरत है.


राज्यपाल ने कहा कि संविधान के निर्माता के रूप में बाबासाहेब ने देश के सभी नागरिकों को मताधिकार का मौलिक अधिकार दिया है. मताधिकार का उपयोग करना हमारा दायित्व है. 2012 के विधान सभा चुनाव में प्रदेश में 12.74 करोड़ मतदाता थे जिसमें केवल 59.52 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया तथा 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 13.88 करोड मतदाताओं में केवल 58.27 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया जिसका मतलब यह है कि करीब 40 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान नहीं किया. शत-प्रतिशत मतदान के लिये स्वयं के साथ दूसरों को भी जागरूक करें. उन्होंने कहा कि प्रबुद्ध लोकशाही के लिये मतदाता अपने मौलिक अधिकार का उपयोग करते हुये मतदान करें.


इस अवसर पर कुलपति डाॅ. आर.सी. सोबती ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा राज्यपाल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया.

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