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वीरांगना ऊदा देवी पर दो बूँद स्याही भी न खर्च कर सके इतिहासकार

 Sabahat Vijeta |  2016-11-16 15:55:36.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. वीरांगना ऊदा देवी पासी के शहीद दिवस को बीएस-4 के कार्यकर्ताओं ने आज ‘स्वाभिमान दिवस’ के रूप में मनाया. लक्ष्मण मेला पार्क, लखनऊ में एक श्रृद्धांजलि सभा के साथ बीएस-4 के कार्यकर्ताओं ने विशाल धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शन कारियों का नेतृत्व बीएस-4 के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उ.प्र. सरकार के पूर्व मंत्री आर.के. चौधरी ने किया.


लक्ष्मण मेला पार्क में अपने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए आर.के. चौधरी ने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अपना जान न्योछावर करने वाले दलित और पिछड़े वर्ग के शहीदों को सरकारों और भारतीय इतिहासकारों ने नजरअंदाज कर दिया. बीएस-4 ऐसे शहीदों को सम्मान दिलाने की लड़ाई लड़ेगा.


आर.के. चौधरी ने कहा कि वीरांगना ऊदा देवी और उनके पति मक्का पासी 1857 के स्वतत्रंता संग्राम में अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे. ऊदा देवी बेगम हजरत महल की सेना में महिला फौजियों की कमाण्डर थीं. उन्होंने ‘कालिन कैम्पवेल’ की सेना से लोहा लिया था और 36 अंग्रेजी सैनिकों को अकेले मौत के घाट उतारा था. सिकन्दरबाग लखनऊ में लड़ते हुए 16 नवम्बर, 1857 को ‘‘सार्जेण्ट क्विकर वालेस’’ की गोली से वे शहीद हो गईं.


सिकन्दरबाग की रणभूमि में कुल 2000 से अधिक सैनिक शहीद हुए थे. लड़ाई शांत होने पर ऊदा देवी की लाश देख कर ‘सार्जेण्ट क्विकर वालेस’ की आंख में आंसू आ गये. उसने लाश को सैल्यूट किया और कहा कि यदि मुझे मालूम होता कि जिसे मैं अपनी गोली का निशाना बनाने जा रहा हूँ वह कोई मर्द नहीं बल्कि अपने देश के लिए लड़ने वाली एक बहादुर औरत है तो चाहे मैं युद्ध के मैदान में खुद मर जाता परन्तु ऐसी बहादुर औरत को न मारता.


‘‘टेमिनी सेन्सेस आफ द ग्रेट म्यूनिटी’’ तथा ‘‘सर विलियम रसेल’’, ‘‘फेडरिक एंगेल्स’’ जैसे दर्जनों अंग्रेजों ने वीरांगना ऊदा देवी की बहादुरी और देश प्रेम की प्रशंसा को लिखा है. परन्तु भारतीय इतिहास कारों और लेखकों ने ऐसी बहादुर वीरांगना के बारे में अपनी कलम की 2 बूंद स्याही खर्च करना उचित नहीं समझा.


ऊदा देवी पासी, झलकारी बाई कोरी, रानी अवन्ती बाई लोधी, राजा जयलाल सिंह, गुलाब सिंह लोधी, चेतराम जाटव, नत्थू धोबी, मक्का पासी, कन्हैया लाल बाल्मीकि और दुक्खन मांझी जैसे दलित और पिछड़े समाज के वीरों वीरांगनाओं के खून को खून नहीं पानी समझा. ऐसे देशभक्त, वीरों-वीरांगनाओं के सम्मान के लिए बीएस-4 ने निर्णायक संघर्ष शुरू किया है. इसी कड़ी में आज लक्ष्मण मेला पार्क लखनऊ में श्रृद्धांजलि सभा सहित बीएस-4 के कार्यकर्ताओं द्वारा विशाल धरना-प्रदर्शनकारियों की ओर से राज्यपाल को सम्बोधित एक ज्ञापन दिया गया.


ज्ञापन में मांग की गई है कि वीरांगना ऊदा देवी का नाम 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की सूची में शामिल किया जाय. राजधानी लखनऊ में उनकी एक भव्य प्रतिमा स्थापित हो और उनके नाम पर एक विशाल पार्क बनाया जाय. हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट की शिक्षण संस्थाओं में वीरांगना ऊदा देवी के बलिदान को पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाय.

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