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बाथरूम का मुद्दा लेकर अमरीकी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ट्रांसजेंडर

 Sabahat Vijeta |  2016-10-31 15:42:52.0

transgender
वाशिंगटन। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एक उच्च विद्यालय के ट्रांसजेंडर छात्र की शिकायत पर सुनवाई करेंगे, जिसमें स्कूल प्रशासन ने उसे लड़कों के बाथरूम के उपयोग से रोक दिया है, क्योंकि जैविक रूप से वह स्त्री है।


यह ट्रांसजेडर का पहला मामला है, जिसकी सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में होगी। इसके नतीजे ओबामा प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्कूलों को दिए गए निर्देशों के बारे में छिड़े विवाद को भी प्रभावित करेंगे। मई में जारी इन निर्देशों में स्कूलों को कहा गया था कि वे ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को उनके लैंगिक पहचान के तदनुरूप बाथरूम और लॉकर रूम का इस्तेमाल करने दें।


हालांकि इन राष्ट्रीय निर्देशों का अमेरिका के 20 से ज्यादा राज्यों ने विरोध किया, साथ ही कई अभिभावक और स्कूल इससे क्रुद्ध हो गए। प्रशासन का यह आदेश शायद ही पूरी तरह से अमेरिका में लागू हो पाया।


इस मामले में उच्च विद्यालय के वरिष्ठ विद्यार्थी गाविन ग्रिम जो 2014 में कई हफ्तों तक लड़कों के शौचालय का प्रयोग कर रहा था, उसे कुछ अभिभावकों द्वारा स्कूल को की गई शिकायत के बाद रोक दिया गया। उसे अपने जैविक लिग के आधार पर शौचालय का चुनाव करने को कहा गया, या फिर उसे निजी, एकल स्टॉल वाले शौचालय में जाने को कहा गया।


17 वर्षीय ग्रिम ने इसके बाद अमेरिकी शिक्षा व्याख्या विभाग का दरवाजा खटखटाया और टाइटल एक्स लागू करने को कहा, जो स्कूलों में यौन भेदभाव पर रोक लगाने के लिए लागू किया गया है। साथ ही उसने स्कूल बोर्ड पर मुकदमा दायर किया।


उसकी शिकायत पर 4थी सर्किट अदालत ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। लेकिन अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में है, जिसने अपीली अदालत के फैसले पर स्थगन का आदेश जारी किया है।


सर्वोच्च न्यायालय फरवरी तक इस मामले पर सुनवाई कर नहीं पाएगी और उसका फैसला जून तक ही आ पाएगा। इस समय तक ग्रासिम की उच्च विद्यालय की पढ़ाई पूरी हो जाएगी और वह फैसला पक्ष में आने पर भी लड़कों के शौचालय का प्रयोग कर नहीं पाएगा। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला दूरगामी असर डालेगा।

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