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मोदी सरकार की यह नीति बढ़ाएगी आपके बिजली का बिल

 Tahlka News |  2016-09-14 06:59:53.0

तहलका न्यूज ब्यूरो 

लखनऊ. केंद्र की मोदी सरकार की नयी बिजली नीति से बिजली की कीमते बढ़ जाएगी इसलिए आल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने बिजली उत्पादन के मामले में निजीघरानों पर अतिनिर्भरता की नीति पर पुनर्विचार की माँग की है.

shailendra-dubey-765x510केन्द्र सरकार द्वारा निजी घरानों से बिजली खरीद बढ़ाने की दृष्टि से राज्य सरकारों के पुराने बिजली घरों को बन्द करने की नीति तय करने के बाद अब नीति आयोग द्वारा 12वीं पञ्च वर्षीय योजना में निजी घरानों को सरकारी क्षेत्र की तुलना में कहीं अधिक बिजली परियोजनाएं देने पर टिप्पणी करते हुए आल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केन्द्र सरकार से माँग की है कि सबको वाजिब दाम पर बिजली मुहैय्या कराने के लक्ष्य को हासिल करना है तो केन्द्र सरकार को निजी घरानों पर अतिनिर्भरता की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए और इस दृष्टि से राज्यों के सरकारी क्षेत्र को अधिक से अधिक बिजली परियोजनाएं प्रदान की जानी चाहिए ।


बिजली इंजीनियरों ने इस सम्बन्ध में नीति आयोग द्वारा निर्धारित किये गए बिजली उत्पादन के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि 12 वीं पञ्च वर्षीय योजना में निजी क्षेत्र को दी गयी परियोजनाएं केन्द्र और सभी राज्यों के सरकारी क्षेत्र को संयुक्त रूप से मिलाकर दी गयी बिजली उत्पादन परियोजनाओं की कुल क्षमता से भी अधिक है जो आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है क्योंकि निजी घराने मुनाफे के लिए काम करते हैं जिससे बिजली के दाम बढ़ेंगे ।

आल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे , उप्रराविप अभियंता संघ के अध्यक्ष जी के मिश्र एवं महासचिव डी सी दीक्षित ने एक बयान में बताया कि 12 वीं पञ्च वर्षीय योजना के लिए नीति आयोग ने 88537 मेगावॉट का लक्ष्य निर्धारित किया है जिसमे केन्द्र के सरकारी क्षेत्र में 26182 मेगावॉट , राज्यों के सरकारी क्षेत्र में 15530 मेगावॉट का लक्ष्य रखा है जबकि निजी क्षेत्र में बिजली उत्पादन के लिए 46825 मेगावॉट की परियोजनाएं दी गयी हैं जो केन्द्र और राज्य सरकार को दी गयी परियोजनाओं के कुल योग 41712 से भी अधिक है जिसका दुष्परिणाम यह होगा बिजली का नियन्त्रण सीधे सीधे निजी घरानों के हाथ में आ जाएगा जो बिजली के दाम और जनकल्याणकारी कार्यों को प्रभावित करेगा । उन्होंने बताया कि देश में बिजली की कुल उत्पादन क्षमता 3 लाख मेगावॉट से अधिक है जबकि अधिकतम मॉंग 165000 मेगावॉट ही है ऐसे में निजी घरानों को अन्धाधुन्ध नयी परियोजनाएं देने के बजाय उपलब्ध बिजली का सही प्रबंधन कर पहले उन 30 करोड़ लोगों को बिजली मुहैय्या करायी जाये जो अभी भी बिजली से वंचित हैं । वैसे भी वर्तमान में निजी घरानों की उत्पादन क्षमता 1 लाख मेगावॉट से अधिक हो गयी है जो केन्द्र या राज्यों के सरकारी क्षेत्र की उत्पादन क्षमता से अधिक है ।

उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के अनुसार सस्ती बिजली के लिए कुल बिजली उत्पादन का कम से कम 70 प्रतिशत उत्पादन राज्य के सरकारी क्षेत्र से होना चाहिए क्योंकि बिना कोई मुनाफा लिए राज्य के सरकारी बिजली घर ही सबसे सस्ती बिजली देते हैं ।ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश में 12 वीं पञ्च वर्षीय योजना में सरकारी क्षेत्र में 1000 मेगावॉट आनपारा डी , 500 मेगावॉट पारीछा और 500 मेगावॉट हरदुआगंज, कुल 2000 मेगावॉट ही है जबकि निजी क्षेत्र की 600 मेगावॉट रोजा ,1980 मेगावॉट ललितपुर और 1980 मेगावॉट बारा परियोजनाएं कुल 4560 मेगावॉट हैं जो सरकारी क्षेत्र की तुलना में काफी अधिक है । वैसे भी ये प्लान्ट महंगी बिजली के लिए चर्चा में बने हुए हैं ।

उन्होंने कहा कि निजी घरानों से बिजली खरीदने के लिए सरकारी क्षेत्र के बिजली घर बंद किये जा रहे हैं ऐसे में यदि निजी क्षेत्र को और अधिक परियोजनाएं दी जाती हैं तो सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों पर बंदी का खतरा और बढ़ जाएगा जो ऊर्जा क्षेत्र के हित में नहीं होगा अतः निजी घरानों पर अतिनिर्भरता की नीति पर केन्द्र और राज्य दोनों सरकारों का पुनर्विचार करना जरूरी है ।

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