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रिज़र्व बैंक खाताधारकों को शत प्रतिशत निकासी की सुविधा दें

 Sabahat Vijeta |  2016-11-23 11:49:28.0


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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप चन्द्रा ने लखनऊ के भारतीय रिजर्व बैंक के प्रबंधक के माध्यम से गवर्नर को ज्ञापन भेजकर मांग की है कि खाताधारकों को बैंक से ज़रुरत पड़ने पर शत प्रतिशत निकासी की सुविधा मिले. उन्होंने लिखा है कि देश के विभिन्न बैंकों पर डायरेक्टिव लगनें पर खाताधारकों को 6 माह में मात्र एक लाख रुपये निकासी की इजाजत थी जिसके लिए मैनें 7 जून 2014 को शत प्रतिशत निकासी करनें की इजाजत देने के सम्बन्ध में पत्र लिखा था जिसके तहत खाताधारकों को एक लाख निकासी की इजाजत 30 जुलाई 2014 को संशोधित निदेश जारी किया था.


उन्होंने लिखा है कि जब गवर्नर करेंसी नोट पर धारक को रूपया अदा करने का लिखित वचन देते हैं तो उन्हीं करेंसी नोट के वचनों को इकठ्ठा कर बैंक के खाते में डालने के बाद निकासी का वचन मात्र एक लाख पर सिमट जाना न सिर्फ अनुचित और हास्यास्पद है बल्कि आपके वचनों का टूटना भी है.


किसी बैंक ने किसी नियम का उलंघन किया है या गड़बड़ी की है तो उसे सजा दें और अगर किसी खाताधारक नें गड़बड़ी की है तो उसका खाता रोक कर उन्हें सज़ा दें, अन्य हजारों खाताधारकों के निकासी को सिमित कर मात्र एक लाख निकासी की इजाजत देना कैसे न्यायसंगत हो सकता है. लिहाज़ा जल्द से जल्द खाताधारकों का बैंकों में जमा धनराशि की शत प्रतिशत निकासी सुनिश्चित करनें का निदेश जारी हो जिससे बेझिझक बैंकों पर यकीन किया जा सके और जमा धनराशि सुरक्षित होने का एहसास हो सके.


विदित हो कि किसी भी बैंक में गड़बड़ी पाने पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया पहले उसे चेतावनी देता है फिर जुर्माना लगाता है और अंत में डायरेक्टिव लगा दिया जाता है जिसके बाद किसी भी खाते से 6 माह में मात्र एक लाख ही निकासी हो सकती है. ओबीसी बैंक, देना बैंक और बैंक आफ महाराष्ट्र पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने प्रत्येक को डेढ़ करोड़ जुर्माना लगाया था अब ये तीनो बैंक डायरेक्टिव लगनें के मुहाने पर खड़े हैं और कभी भी इन पर डायरेक्टिव लग सकता है, इसे बताने के लिए 25 नवम्बर को दोपहर 2 बजे लखनऊ के हजरतगंज स्थित ओबीसी बैंक पर जनहित में जागरूकता अभियान चलाएंगे.

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