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कैंसर पीड़ितों के इलाज का पैसा खा रहा था यह शख्स

 Sabahat Vijeta |  2016-08-28 17:06:01.0

beggar


मुम्बई. महाराष्ट्र की रेलवे पुलिस ने एक ऐसे शातिर भिखारी को गिरफ्तार किया है जो कैंसर पीड़ितों की मदद करने के नाम पर डोनेशन मांगता था लेकिन उन पैसों को कैंसर पीड़ितों की मदद करने के बजाय वह खुद ऐश करता था. पिछले साल एक व्यक्ति इसी तरह जबलपुर स्टेशन पर कैंसर पीड़ितों के नाम पर वसूली करता हुआ गिरफ्तार किया गया था.


महाराष्ट्र की रेलवे पुलिस ने ट्रेनों और प्लेटफॉर्म पर मदद मांगने वालों से सावधान रहने की बात कही है. मुम्बई जाने वालों से कहा गया है कि मुम्बई में कैंसर पीड़ितों की मदद के नाम पर लूट का धंधा चल रहा है. इस तरह का धंधा करने वाला जब किसी के सामने कैंसर के मरीज़ का इलाज कराने के नाम पर सिर्फ एक रूपये की मदद मांगता है तो कोई इनकार नहीं कर पाता है.


मदद करने वाला तो अपनी जेब से कैंसर पीड़ित के नाम पर पैसा निकलता है लेकिन उस पैसे से किसी का इलाज नहीं होता बल्कि वह खुद ऐश करता है. लूट का यह धंधा करने वाला लोगों के सामने एक शानदार प्रस्ताव रखता है. एक रुपया यानी एक ज़िन्दगी. हकीकत में यह पैसा कमाने का शार्टकट है.


Woman Hand Grabbing A Steel Wire Mesh


इस शख्स को देखकर यह अंदाज लगाना बहुत मुश्किल है की यह भिखारी है. अगर इसके पहनावे और चाल ढाल पर गौर किया जाए तो यह शख्स कहीं से भी भिखारी नहीं लगता. लेकिन यह सच है की यह भिखारी है. हालांकि यह और भिखारियों से बिलकुल अलग है. इसका भीख मांगने का तरीका भी बिलकुल अलग है. जिसे भीख देने में हम और आप खुद भी आगे बढ़कर इसे भीख देने में ज़रा भी गुरेज़ नहीं करेंगे. यह शख्स कैंसर पीड़ितों को मदद करने के नाम पर इस स्लोगन के सहारे भीख मांगता है कि एक रुपया एक ज़िन्दगी. इस शख्स के मदद मांगने के पीछे की कहानी सुनेंगे तो तो पैरों नीचे से ज़मीन खिसक जाएगी और आपको सिवाय अफसोस के कुछ भी हासिल नहीं होगा. आप हैरान हो जायेंगे यह जानकर कि जिस शख्स को आप कैंसर पीड़ितों के नाम पर मदद दे रहे थे वह पीड़ितों की मदद करने के बजाय अपने ऐश के लिए पैसे मांगता है.


इस मामले के जाँच अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि 26 अगस्त को रात आठ बजे की घटना है. उन्हें शिकायत मिली कि एक व्यक्ति कैंसर पीड़ितों की मदद के नाम पर भीख मांग रहा है. तब हम वहां स्टाफ के साथ गए वहां पर एक व्यक्ति को पाया कि उसके हाथ में एक रुपया एक ज़िन्दगी जो कैंसर मरीजों के लिए पैसा इकठ्ठा कर रहा था. उसके हाथ में पैसे जमा करने वाला बॉक्स था. हमने उससे पूछताछ की कि आपने प्रशासन से कोई अनुमति ली है तो उसने कोई अनुमति नहीं ली है और ना ही अपने को किसी एनजीओ से जुड़ा हुआ बताया.


बृजेश सिंह ने बताया कि रेलवे एक्ट में मामला होने के कारण उस भिखारी को आरपीएफ चौकी में लाया गया. जहाँ उसने बताया की यहाँ काम वह मुलुंड और घाटकोपर स्टेशन पर भी करता है. वह महीने में 7-8 बार आता है.


मुम्बई पुलिस के अनुसार यह शख्स मुम्बई के मुलुंड और घाटकोपर स्टेशन पर इसी तरीके से कैंसर पीड़ितों की मदद के नाम पर भीख मांगता था और महीने में 7-8 बार इस काम को अंजाम देता था. जिसके बदले में उसे एक दिन में 1500 - 2000 रूपये जमा हो जाते थे. पुलिस के मुताबिक ट्रेनों और प्लेटफॉर्म पर इस तरह से भीख माँगना गैरकानूनी है.


पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के बाद जांच शुरू कर दी है. पुलिस को शक है की इस गैंग में और भी लोग शामिल हो सकते हैं. जो भीख मांगने के लिए यही तरीका इस्तेमाल करते हुए बगैर मेहनत पैसा कमाकर ऐश कर रहे हैं.

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