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फोटोग्राफी बनी जनसंचार का बहुत बड़ा साधनः नवनीत सहगल

 Sabahat Vijeta |  2016-08-20 18:27:41.0

sahgal

लखनऊ फोटो फेयर-2016 का समापन

पर्यटन विभाग के सहयोग से भव्य होगा अगला आयोजन

लखनऊ। ‘फोटोग्राफी की तकनीक और उसके इस्तेमाल में इस मोबाइल कैमरे के दौर में क्रान्तिकारी बदलाव आया है। वह अकेले बहुत बड़ा कम्यूनिकेशन का साधन बन गई है। फोटो फेयर में आकर मैं उसकी तकनीक में और भी नया बदलाव देख रहा हूं। फोटो फेयर का अगला आयोजन और भव्य हो, साथ ही हमारे पर्यटन विभाग का ऐसा ही सहयोग भी उसे मिलता रहे, यही कामना है।’


कहना था पर्यटन महानिदेशक व प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल का। वे कल यहां पर्यटन भवन गोमतीनगर के सभागार में ‘लखनऊ फोटो फेयर-2016’ का समापन कर रहे थे। उन्होंने फोटोग्राफी में उल्लेखनीय कार्य करने वाले छायाकार सुबीर राय को लाइफ टाइम अचीवमेण्ट अवार्ड से सम्मानित किया। लाइफ टाइम अचीवमेण्ट अवार्ड पाने वाले दूसरे प्रमुख छायाकार सुरेन्द्र श्रीवास्तव शहर से बाहर होने के कारण अवार्ड नहीं ले सके।


संयोजक मनोज चंदेल ने पर्यटन महानिदेशक श्री सहगल, जोधपुर के छायाकार शिवजी जोशी, मुम्बई के फैशन छायाकार रफीक सैयद व दिल्ली की दिल्ली की शर्मिष्ठा दत्ता के साथ ही सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फोटो फेयर को पर्यटन विभाग के सहयोग के साथ ही आम लोगों का बहुत ही अच्छा रिस्पांस मिला। अगला आयोजन और भी भव्य हो इस बात के प्रयास होंगे। इस मौके पर फोटो कांस्टेस्ट के विजेताओं विशिष्ट स्टाल धारकों के साथ सम्मानित किया गया। इनमे सामान्य वर्ग में टाॅप तीन प्रविष्टियां भावंशु सिंह, धर्मेन्द्र यादव व हरिकेश यादव की व सर्वश्रेष्ठ तीन प्रविष्टियां अमरेश कुमार वर्मा, शिवम शर्मा व अरुण खन्ना की रहीं। छात्रवर्ग टाॅप थ्री में मीनुस खान, रचित पाण्डे व मीनाक्षी पाण्डे और सर्वश्रेष्ठ तीन में अजयकुमार, पूर्वी दीक्षित व शिवोम सिंह की उतारी तस्वीरें जूरी सदस्यों ने चुनीं। अंतिम दिन कैमरा कार्यशाला के साथ ही कलर मैनेजमेण्ट को लेकर कार्यशाला रखी गई थी। इसके साथ ही अमूर्तन छायाकारी को लेकर अविनाष चन्द्र लिटिल ने सेमिनार में फोटोग्राफी के विभिन्न पक्षों को सामने रखा और लोगों के प्रश्नों के उत्तर दिये। यहां एफआईपी अध्यक्ष अनिल रिसाल सिंह, प्रदेश ओलम्पिक संघ के उपाध्यक्ष टीपी हवेलिया, आर्टस कालेज लखनऊ के डीन भूपेश चन्द्र लिटिल, एमिटी यूनिवर्सिटी के असिस्टेण्ट प्रो.त्रिलोचन कालरा व दुष्यंत ह्यूमन, आरजे जमशेद बड़ी तादाद में छायाकार, कलाप्रेमी व विद्यार्थी उपस्थित थे।

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