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हाई रिस्क प्रेगनेंसी पर ख़ास नज़र रखेगा स्वास्थ्य विभाग

 Sabahat Vijeta |  2016-10-13 15:04:54.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को घटाने के लिए गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल और संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन देने के लिये राज्य सरकार ने 14 से 21 अक्टूबर तक मातृत्व सप्ताह मनाने का फैसला किया है. इस सप्ताह में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी दी जायेगी.


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 50 प्रतिशत गर्भवती महिलायें एनीमिया से पीड़ित हैं जो मातृ मृत्यु का सबसे बड़ा कारक है. इसके अलावा उच्च रक्तचाप एवं पूर्व से उपस्थित बीमारियों की समय से पहचान न होना भी मातृ मृत्यु को बढ़ाता है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में गत 10 वर्षों से जननी सुरक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस अभियान की वजह से संस्थागत प्रसव 17 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत हो गए हैं. लेकिन अभी भी 30 प्रतिशत से अधिक घरेलू प्रसव हो रहे हैं. जिसको ख़त्म करने के लिए प्रत्येक गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़कर संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करना ज़रूरी है.


उन्होंने बताया कि जनवरी 2016 में स्वास्थ्य विभाग एवं राज्य पोषण मिशन ने प्रदेश के सभी गांवों में मातृत्व सप्ताह का आयोजन किया जिसके दौरान 17,65,104 गर्भवती महिलाओं का चिन्हीकरण कर 15,97,102 गर्भवती महिलाओं की समस्त जांचें कीं. सभी जनपदों में 1,14,000 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं का चिन्हीकरण किया गया और उनकी ब्लॉक, जनपद स्तरीय चिकित्सा इकाइयों पर जांचें कराई गयीं, इस अभियान के फलस्वरूप ग्रामीण अंचलों में हीमोग्लोबिन तथा ब्लड प्रेशर की जांच तथा जटिलता वाली गर्भावस्था के चिन्हीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ी.


उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा पहली जनवरी 2017 से जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन धनराशि प्राप्त करने के लिए प्रत्येक लाभार्थी का आधार लिंक्ड बैंक खाता अनिवार्य कर दिया गया है. यह जानकारी प्रत्येक गर्भवती महिला तक पहुंचाने के लिए मातृत्व सप्ताह एक महत्वपूर्ण अवसर है जिसके लिए एएनएम, आंगनवाड़ी व आशा को घर-घर में इस सम्बन्ध में जागरूकता बढाने के निर्देश दिए गए हैं.


श्री सिन्हा ने बताया कि मातृत्व दिवस के दिन सभी महिलाओं का पंजीकरण कराया जाएगा. पंजीकरण के बाद उनका वजन, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, यूरीस्टिक्स द्वारा पेशाब में एल्ब्यूमिन व शुगर की जांच कराई जायेगी. इसके अलावा सभी गर्भवती महिलाओं की पेट की जांच, टिटनेस की सुई और पोषण संबंधी सलाह दी जायेगी.


गर्भवती महिलाओं को आयरन, कैल्शियम, एलबेंडाजॉल की गोलियां भी दी जायेंगी. गर्भवती महिलाओं को 180 आयरन की गोलियां गर्भावस्था में और 180 आयरन की गोली प्रसव के बाद दी जायेंगी. इसी तरह कैल्शियम की 360 गोली प्रसव पूर्व एवं 360 गोली प्रसव के बाद स्तनपान कराते समय 6 महीने तक दी जायेंगी. सभी गर्भवतियों को 4 से 6 माह के मध्य 01 एलबेंडाजॉल की गोली भी दी जायेगी.


जिन महिलाओं में किसी खतरे का चिन्ह पाया जाये या फिर गंभीर एनीमिया से ग्रसित हों उनके कार्ड पर लाल बिंदी लगाते हुए उनको पूर्व निर्धारित तिथि पर दसवें दिन ब्लॉक स्तरीय सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा जिला महिला संयुक्त चिकित्सालयों पर संदर्भित किया जाएगा.

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