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महानतम मुक्केबाज मोहम्मद अली सुपुर्द-ए-खाक

 Sabahat Vijeta |  2016-06-11 16:35:27.0

muhammad-aliलुइसविले (केंटकी)| महानतम मुक्केबाज मोहम्मद अली को अमेरिका के केंटकी राज्य के लुइसविले में अंतिम विदाई देने शुक्रवार को हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। अली को लुइसविले के केव हिल कब्रिस्तान में दफनाया गया। इससे पहले उनकी शवयात्रा उन सभी स्थानों से होकर गुजरी, जो उनके जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखते थे।


जैसे ही अली की शवयात्रा उनके प्रशंसकों के पास से गुजरी, वे भावुक हो गए। अली का पिछले शुक्रवार को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। मुसलमान, ईसाई, यहूदी समुदाय के लोगों ने दिग्गज मुक्केबाज को श्रद्धांजलि दी और नागरिक अधिकारों के लिए उनका संघर्ष बयां किया।


अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से भेजे गए संदेश में अली की मौलिकता की प्रशंसा की गई। अली की शवयात्रा के दौरान कई इलाकों में कुछ युवा तख्तियां लिए खड़े थे, जिनपर लिखा था, "अली सर्वश्रेष्ठ हैं। सभी यादों के लिए शुक्रिया।" उन्होंने इस दौरान फूल भी बरसाए।


दिग्गज मुक्केबाज के अंतिम संस्कार की शुरुआत अरबी में कुरान पढ़ने से की गई। इसे इमाम हमजाह अब्दुल मलिक ने पढ़ा। अली को अंतिम विदाई देने कई गणमान्य हस्तियां और हजारों की संख्या में लोग केएफसी यम! सेंटर में जुटे थे, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भी शामिल थे। उन्होंने अली को 'आत्मविश्वास से परिपूर्ण एक स्वतंत्र व्यक्ति' बताया।


क्लिंटन ने कहा, "मेरा मानना है कि उन्होंने काफी युवावस्था में ही अपने जीवन की कहानी रचने का फैसला कर लिया था।" अली के अंतिम संस्करा में आने वालों को नि:शुल्क टिकट प्रदान किए गए थे। अली की पत्नी ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, "मोहम्मद अली धर्म, विश्वास और अपने नाम को लेकर बेहद दृढ़ रहे, भले ही इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़ी। वह चाहते थे कि युवा उनके जीवन को एक ऐसे साक्ष्य के रूप में देखें, जिससे उन्हें इसकी प्रेरणा मिले कि प्रतिकूल परिस्थितियां आपको मजबूत बनाती हैं। यह आपको सपने देखने और उन्हें पूरा करने से नहीं रोक सकतीं।"


अली को निजी तौर पर जानने वाली ओबामा की एक सहयोगी वैलेरी जैरेट ने राष्ट्रपति से मिले एक पत्र को पढ़ते हुए कहा, "उनके युग के लोगों से अधिक उज्जवल और प्रभावशाली अली एक अमेरिकी थे। वह हमेशा ही एक अमेरिकी रहेंगे। क्या व्यक्ति थे।"


राष्ट्रपति ओबामा मोहम्मद अली के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि वह वाशिंगटन में अपनी सबसे बड़ी बेटी मालिया के ग्रैजुएशन समारोह में हिस्सा ले रहे थे। 1942 में जन्मे अली इस्लाम कबूल करने से पहले 'कैसियस क्ले' के नाम से जाने जाते थे। उन्होंने 1964 में इस्लाम कबूला था। दिग्गज मुक्केबाज ने 12 वर्ष की छोटी-सी उम्र में मुक्केबाजी का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था और छह साल बाद 1960 में रोम ओलम्पिक में स्वर्ण पदक हासिल किया था।


अली के नाम 56 जीत और महज पांच हार दर्ज हैं, जिनमें से 37 नॉकआउट थीं। 'द ग्रेटेस्ट' के उपनाम से मशहूर अली पहले ऐसे मुक्केबाज थे, जिन्हें विश्व की प्रसिद्ध मुक्केबाजी पत्रिका द रिंग ने पांच बार 'फाइटर ऑफ द ईयर' का खिताब दिया था।


वह तीन बार हैवीवेट चैम्पियन बनने वाले इकलौते मुक्केबाज भी हैं। उन्होंने 1964, 1974 और 1978 में ये खिताब हासिल किए थे। वह 25 फरवरी से 19 सितंबर, 1964 तक बिना किसी विवाद के हैवीवेट चैम्पियन रहे थे, जबकि एक खेल पत्रिका ने उन्हें 'स्पोर्ट्समैन ऑफ द सेन्चुरी' का खिताब दिया था। बीबीसी ने उन्हें 'स्पोर्ट्स पर्सनलटी ऑफ द सेन्चुरी' का खिताब दिया था।


अली के संन्यास लेने के बाद उनकी बीमारी को लेकर अफवाहें फैलने लगीं थीं। पार्किं सन से ग्रस्त अली ने यात्राएं की और कई समारोहों में नजर भी आए। दिग्गज मुक्केबाज 1996 के अटलांटा ओलम्पिक खेलों में मशाल धारक भी रहे और 2012 लंदन ओलम्पिक खेलों के उद्घाटन समारोह में इसके ध्वजधारक भी रहे।

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