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गवर्नर ने लखनऊ में बाल भवन की ज़रुरत जताई

 Sabahat Vijeta |  2016-12-22 12:57:13.0

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता में आज राजभवन में उत्तर प्रदेश बाल कल्याण परिषद की कार्यकारिणी समिति की बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में परिषद की चेयरमैन श्रीमती उज्जवला कुमारी, महासचिव श्रीमती रीता सिंह, सदस्य सरजीत सिंह डंग, मुख्य वन संरक्षक श्रीमती ईवा शर्मा सहित अन्य जनपदों से आये परिषद के पदाधिकारियों सहित वन, बाल विकास पुष्टाहार एवं वित्त विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे.


बैठक में निर्णय लिया गया कि कुमारी अंशिका पाण्डेय एवं कुमारी काजल कौशल को प्रदेश स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर बाल कल्याण परिषद द्वारा सम्मानित किया जायेगा. भारतीय बाल कल्याण परिषद द्वारा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2016 के लिये कुमारी अंशिका पाण्डेय का चयन किया गया है, जिसका सम्मान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 25 जनवरी, 2017 को दिल्ली में किया जायेगा तथा बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित बालगृह की संवासिनी कुमारी काजल कौशल को साहित्य संस्थान न्यास द्वारा ‘बालोदय प्रतिभा सम्मान 2016’ से सम्मानित किया गया है.


बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि बाल विकास परिषद की पूर्व अध्यक्ष बेगम हामिदा हबीबुल्लाह को शतायु होने पर बधाई देने के लिये परिषद के सदस्यों का प्रतिनिधिमण्डल उनसे मिलने जायेगा. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि परिषद द्वारा संचालित लीलावती मुंशी निराश्रित बालगृह में पेटीएम की व्यवस्था एवं बालगृह की सुरक्षा के लिये सीसीटीवी कैमरे लगाये जाये.


राज्यपाल ने बैठक की अध्यक्षता करते हुये कहा कि लखनऊ में स्तरीय बाल भवन का निर्माण किया जाये. बाल भवन की भावी आवश्यकताओं तथा संस्था की नीतियों के आधार पर विस्तृत योजना बनाकर परिषद उन्हें प्रस्ताव प्रेषित करें. वन विभाग द्वारा लीज पर उपलब्ध भूमि, जिस आशय से आवंटित की गयी है उसका व्यापक उपयोग हो. परिषद द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं को गति देने के लिये प्रमुख सचिव राज्यपाल की अध्यक्षता में वन, बाल विकास पुष्टाहार, महिला कल्याण एवं समाज कल्याण विभाग के शासन स्तर के अधिकारियों के साथ बैठक की जाये तथा परिषद में आये सुझावों पर विस्तृत रूप से चर्चा करके क्रियान्वित किया जाये.


श्री नाईक ने कहा कि परिषद की योजनाओं को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिये केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा मिलने वाले वित्तीय अनुदान के बारे में उन्हें परिषद द्वारा शीघ्र जानकारी दी जाये, जिससे संबंधित विभाग से समन्वय करके अनुदानों को समय पर प्राप्त किया जा सके. परिषद के अंतर्गत चलाये जा रहे क्रैशे एवं निराश्रित बच्चों के लिये संचालित बालघर का नियमित निरीक्षण भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारी अनुदान के दुरूपयोग को रोकने के लिये यह जरूरी है कि स्वयं सेवी संस्थायें एवं गैर सरकारी संस्थायें जो बच्चों की देखभाल के लिये कार्य कर रही हैं, ठीक प्रकार से कार्य करें. इस अवसर पर पूर्व में हुई कार्यकारिणी की बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि भी हुई.

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