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डाक्यूमेंट्री में दिखा बेगम हज़रत महल का शौर्य

 Sabahat Vijeta |  2016-05-30 18:05:06.0

bhmतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. 1857 में अंग्रेज़ों को नाको चने चबवाने वाली अवध की आख़री मलिका बेगम हज़रत महल पर फिल्म प्रभाग द्वारा बनाई गई डाक्यूमेंट्री फिल्म को पर्यटन भवन के सभागार में लखनऊ में रहने वाले हर वर्ग के प्रतिनिधि ने देखा और सराहा.


अंग्रेजों के निर्देश पर अवध को छोड़कर नवाब वाजिद अली शाह जब कोलकाता चले गए तो बेगम हजरत महल ने अपने बेटे बिर्जीस क़दर को अवध का बादशाह घोषित करते हुए अंग्रेज़ों के खिलाफ जंग छेड़ दी. बेगम हज़रत महल ने कई मोर्चों पर अंग्रेजों को धूल चटाई लेकिन मुट्ठी भर सैनिकों के साथ वह कब तक मुकाबला करतीं. उन्हें भारत छोड़कर नेपाल भागना पड़ा. नेपाल के महाराजा जंग बहादुर ने उन्हें नेपाल में शरण दी.


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बेगम हज़रत महल के इंतकाल के बाद बिर्जीस क़दर कोलकाता चले गए और नवाब वाजिद अली शाह के बसाए मटिया बुर्ज में रहने लगे. उन्हें भी कम उम्र में ज़हर देकर मार दिया गया. बिर्जीस क़दर के पोते-पोतियाँ अब उनकी विरासत संभाल रहे हैं. मटिया बुर्ज के सिब्तैनाबाद इमामबाड़े में नवाब वाजिद अली शाह, उनके बेटे बिर्जीस क़दर और उनके एक पोते को दफ्न किया गया.


डाक्यूमेंट्री को रेखा चित्रों और जानकारों के इंटरव्यू के माध्यम से तैयार किया गया है. आज इस डाक्यूमेंट्री का पर्यटन भवन में प्रदर्शन हुआ तो बेगम हजरत महल के पौत्र प्रो. कौकब क़दर, पौत्री मंज़िलत फ़ातिमा, कन्नौज की सांसद डिम्पल यादव, फिल्मकार मुज़फ्फ़र अली, मीरा अली, लखनऊ विश्विद्यालय की पूर्व वाइस चांसलर प्रो. रूप रेखा वर्मा, पहली एडवोकेट जनरल बुलबुल गोदियाल, डीजी सुतापा सान्याल, लखनऊ एक्सप्रेशन की निदेशक कनक रेखा चौहान, वसीम सिद्दीकी, रौशन तकी,रवी भट्ट, नवाब जाफर मीर अब्दुल्ला, वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरन और वक़ार रिजवी आदि मौजूद थे. बेगम हजरत महल की डाक्यूमेंट्री के प्रदर्शन के समय हालात यह थे कि इसे देखने वाले इतने ज्यादा थे कि कुर्सियां कम पड़ गईं थीं और लोग खड़े होकर अपने इतिहास पर रोमांचित हो रहे थे.

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