इस कमिश्नर का ऐसा आतंक ! 2 आईएएस अफसरो और4 पीसीएस अफसरों ने करा लिया अपना तबादला

 2016-10-09 10:32:16.0

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उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ . अपनी कुख्यात कार्यशैली के कारण हमेशा आलोचनाओं के घेरे में रहे सूबे के 1988 बैच के एक आईएएस अफसर ने बतौर कमिश्नर अपनी तैनाती के दौरान अपने बर्ताव से अधीनस्थो में आतंक की स्थिति पैदा कर दी है. बंगले पर तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तो बाकायदा आन्दोलन कर सड़को पर उतर चुके हैं, साथ ही अब तक 2 आईएएस अफसर और 4 वरिष्ठ पीसीएस अफसर अपना तबादला करा चुके हैं.

इलाहाबाद के कमिश्नर राजन शुक्ल के की कार्यशैली, ,तरीका-सलीका, बात-व्यवहार के कारण फिलहाल कोई मातहत अधिकारी उनके साथ काम करने को ही तैयार नहीं है. कमिश्नर के अधीनस्थ 4 अपर आयुक्तों में से इस वक्त सभी पद खाली हो गए हैं. इन पदों पर तैनात अधिकारियों ने अलग अलग वजहे बता कर अपना तबादला अन्यत्र करा लिया है.आज की तारीख में इलाहबाद मंडल में अपर आयुक्त के चारो  पद खाली हो गए हैं  और कोई भी अधिकारी वहां जाने को ही तैयार नहीं है.


राजन शुक्ल के अधीनस्थ काम कर रही महिला आईएएस अधिकारी कनक त्रिपाठी ने सबसे पहले इनपर आरोप लगाया था. कनक त्रिपाठी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि कमिश्नर ने इतनी बुरी शब्दावली में उन्हें फटकार लगायी कि वे दफ्तर में ही बेहोश हो गयी थी.

इसके बाद आईएएस अधिकारी दिव्यप्रकाश गिरी, सीनियर पीसीएस उदयभानु त्रिपाठी, शेषमणि पाण्डेय, देवेन्द्र पाण्डेय रहे हो या अपर आयुक्त जितेन्द्र कुमार , इन सभी ने एक एक कर अपना तबादला करवा लिया और और इन सब तबादलों के पीछे की असली वजह रही कमिश्नर राजन शुक्ल की गाली गलौच वाली भाषा और तानाशाही बर्ताव .

राजन शुक्ल का विवादों के साथ पुराना नाता रहा है. बतौर डीएम गाजीपुर, गोरखपुर और जौनपुर जिलों में  उनकी तैनाती के वक्त भी राजन शुक्ल पर इसी तरह के आरोप लगे थे. इसके बाद शासन ने 12 साल तक उन्हें फील्ड पोस्टिंग से दूर रखा था. समाजवादी पार्टी के संस्थापको में से एक कद्दावर नेता से जातीय समीकरण बैठने के कारण राजन शुक्ल को बतौर कमिश्नर इलाहाबाद की पोस्टिंग मिली.

कमिश्नर बंगले पर तैनात कर्मचारियों ने भी राजन शुक्ल और उनके पिता के ऊपर मार पीट करने का आरोप लगते हुए अपना तबादला कराने का प्रतिवेदन दे दिया. मामला कर्मचारी संगठनो तक पहुंचा था और संगठन ने इस मुद्दे पर एक हड़ताल भी की थी. इलाहाबाद विकास प्राधिकरण के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने तो कमिश्नर बंगले पर तैनाती लेने से ही इनकार कर दिया था.

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