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एक डे नाईट मैच की फ्लड लाइट देती है सौ गाँव को साल भर का अँधेरा

 Sabahat Vijeta |  2016-10-09 13:12:24.0

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कानपुर. डीएवी कालेज, कानपुर में आयोजित गंगा प्रदूषण विश्लेषण और उपाय विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन तकनीकी सत्र में वक्ता के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय से आयीं डॉ. ऊषा बाजपेयी ने पयर्टन के द्वारा होने वाली आय और प्रदूषण पर चर्चा की. डे - नाइट मैच में जिस फ्लड लाइट का प्रयोग किया जाता है उससे एक वर्ष पूरे 100 गॉवो को बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है यह एक विश्लेषण है नदी के प्रदूषण को साफ करने में सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जा सकता है. वायु प्रदूषण के कारण सांस की समस्या पैदा हो रही है.


मुख्य वक्ता के रूप में डी.जी.क्यू.ए. से आये प्रिन्सपल साइन्टिफिक आफिसर्स डॉ. एस. के. तिवारी ने अपने उद्बोधन में जल और स्वास्थय पर चर्चा करते हुए कहा कि बिना खाना खाये तो आप लम्बे समय तक रह सकते है परन्तु बिना जल के यह सम्भव नहीं है. जल शरीर के तापमान को भी नियन्त्रित करता है शरीर पानी से बना है इसलिए शरीर को शु़द्ध जल चाहिए जल के विभिन्न रूपों में किये जा रहे प्रयोग पर विस्तृत चर्चा की.


द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रमुख वक्ता डॉ. अमर श्रीवास्तव ने अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि गंगा की विरसता और निर्मलता अति आवश्यक है अविरलता बनी रहे यह सरकार का कर्तव्य है जब कि निर्मलता बनाये रखना जन मानस का कर्तव्य है वह मन से इसकी स्वच्छता से जुड़ें. उन्होंने कहा कि विकास टिकाऊ होना चाहिए जिससे पर्यावरण को नुकसान ना हो.


गंगा की गोद में जीवन पलता है. दूसरे वक्ता डॉ. डी.पी. राव ने अपने उदबोधन में कहा कि गंगा तट पर अस्थियॉ विसर्जित करने से अत्याधिक गंगा प्रदूषण हो रहा है. दशहरे के अवसर पर मूर्तियां विसर्जित करने से भी अधिक प्रदूषण होता है. इनकी वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए. रासायनिक कारणों के अतिरिक्त भौतिक क्रियाओं से जल प्रदूषण अधिक होता है. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अशोक श्रीवास्तव ने की. संगोष्ठी में डॉ. अशोक कुमार श्रीवास्तव, डॉ. अनिल अवस्थी, डॉ. राजुल सक्सेना, डॉ. विनीता, डॉ. अनीता इत्यादि लोग उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमर श्रीवास्तव ने किया.

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