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टैगोर के साहित्य से देश को पहला नोबेल मिला

 Sabahat Vijeta |  2016-05-08 17:52:28.0

gov-taigoreलखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज लखनऊ बंगीय नागरिक समाज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की 155वीं जयंती पर जिलाधिकारी आवास के सामने स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके अपना आदर व्यक्त किया। संस्था बंगीय नागरिक समाज द्वारा गुरूदेव टैगोर की प्रतिमा के समक्ष 155 दीप जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विधायक डाॅ. रीता बहुगुणा जोशी, पूर्व पुलिस महानिदेशक के.एल. गुप्ता, भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक गौतम सेन गुप्ता, मीर अब्दुल्ला जाफर, सुधीर हलवासिया सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में रवीन्द्र नाथ टैगोर द्वारा रचित 31 पंक्तियों वाला सम्पूर्ण ‘जन गण मन‘ गान प्रस्तुत किया गया।


राज्यपाल ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि आज रवीन्द्र नाथ टैगोर की 155वीं जयंती है। ‘पिछले साल भी मैं आया था। तब और अब में दो अन्तर हैं। गये समय पर 154 दीप जलाये गये थे और अब 155 दीप जलाये गये हैं तथा पिछले साल रवीन्द्र नाथ टैगोर की प्रतिमा पर प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके लिए बंगीय समाज ने मुझसे अनुरोध किया था। दो दिन पहले ही मैंने जिलाधिकारी लखनऊ से प्रतिमा पर प्रकाश व्यवस्था के संबंध में बात की थी। मुझे प्रसन्नता है कि काम कैसे होना चाहिए, जिलाधिकारी लखनऊ ने करके दिखाया।‘ उन्होंने बंगीय समाज को आश्वासन दिया कि जैसे प्रतिमा पर प्रकाश की व्यवस्था हो गयी है उसी तरह उनकी अन्य मांगों पर भी विचार किया जायेगा।


श्री नाईक ने कहा कि गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की यह विशेषता है कि उनके साहित्य से देश को पहला नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। गीतांजलि का कई विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ। ऐसा भाग्य कम साहित्यकारों को मिलता है। गीतांजलि को नोबेल पुरस्कार मिलने से भारतीयों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। टैगोर ने बांग्ला और अंग्रेजी के अलावा हिन्दी में कबीर और सूरदास पर भी लिखा। दो राष्ट्रों के राष्ट्रगान बनाने का श्रेय अकेले रवीन्द्रनाथ टैगोर को जाता है। ‘वंदे मातरम‘ और ‘जन गण मन‘ दोनों हमें बांग्लाभाषी साहित्यकारों से मिले हैं। गुरूदेव के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यहीं होगी कि उनके दिखाये मार्ग पर चलने का संकल्प लें। राज्यपाल ने कहा कि हमें यह भी संकल्प लेना होगा कि जिस प्रकार गुरूदेव टैगोर ने देश का नाम ऊंचा किया, उसी तरह हम भी देश को नयी ऊंचाई पर ले जायें।


राज्यपाल ने इस अवसर पर अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 12 महिलाओं को स्मृति चिन्ह, शाॅल व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने वाली महिलाओं में डाॅ. रीता बहुगुणा जोशी, डाॅ. साबरा हबीब, श्रीमती सुतापा सान्याल आईपीएस, श्रीमती माधवी कुकरेजा, श्रीमती माधुरी हलवासिया, श्रीमती पुष्पलता अग्रवाल, सुश्री सुरभि टण्डन तथा श्रीमती सुनीता झिंगरन शामिल थीं। सुश्री श्वेता गर्ग, सुश्री रूना बनर्जी, कुलपति श्रीमती श्रुति सडोलीकर काटकर और महंत देव्यागिरी शहर से बाहर होने के कारण सम्मान समारोह में उपस्थित नहीं हो सकी। कार्यक्रम में स्वागत भाषण पी.के. दत्ता मुख्य संयोजक ने दिया।

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