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सुरभि ने किया ‘सुंदरकाण्ड’ का दर्शनीय प्रदर्शन

 Sabahat Vijeta |  2016-04-23 15:01:28.0


  • ‘...तोहि समान उपकारी, नहिं कोऊ सुर नर मुनि तनु धारी’

  • असीमबंधु और सुरभि सिंह ने कथक गतियों में उतारा तुलसी का सुंदरकाण्ड


surabhi singhलखनऊ, 23 अप्रैल। रामभक्त हनुमान के भक्ति एवं समर्पण भाव को दर्शाती कथक नृत्यनाटिका ‘सुंदरकाण्ड’ का दर्शनीय प्रदर्शन यहां सुधी दर्शकों को कला के अप्रतिम रंगों में डुबो गया। कल्चरल क्वेस्ट संस्था की ओर से संस्कृति विभाग भारत सरकार के सहयोग से संत तुलसीदास रचित राम चरित मानस के सुंदरकाण्ड पर आधारित इस कथक नृत्यनाटिका की प्रस्तुति हनुमान जयंती के अवसर पर आज शाम संगीत नाटक अकादमी भवन के संत गाडगे प्रेक्षागृह गोमतीनगर में हुई।


शिकागो, अमेरिका व दक्षिण कोरिया के साथ ही दिल्ली, कोलकाता, वाराणसी, इलाहाबाद में हो चुकी इस प्रस्तुति में नृत्व निर्देशक व कोरियोग्राफर असीम बंधु भट्टाचार्य ने जहां हस्तकों का सुंदर प्रयोग किया है वहीं गति भरे दर्शनीय संयोजनों का बेहतर इस्तेमाल किया है। इसके साथ ही प्रस्तुति में कथक के अलावा भरतनाट्यम, छाऊ, समसामयिक नृत्य की मुद्राओं, गतियों व नृत्य संयोजन का भी विविधता भरा प्रयोग किया है।


प्रस्तुति में हनुमान एवं सीता की भूमिका में प्रस्तुत कर्ता व परिकल्पनाकार सुरभि सिंह टण्डन ने भावों का खूबसूरत प्रदर्शन कथक गतियों में किया। राम की भूमिका में शम्शुर्रहमान, रावण की भूमिका में अभय गुप्ता, विभीषण की भूमिका मोहित कपूर, त्रिजटा की भूमिक में समता बाजपेयी व सूत्रधार की भूमिका में हेमन्त व अस्मिता ने अच्छा प्रभाव छोड़ा। साथी नृत्य कलाकारों में निवेदिता, सौमित्र, पंकज, अक्षरा, शिवि व रौनी शामिल थे। नृत्यनाटिका में सुमन सरकार के संगीत निर्देशन में पार्श्वगायन मुख्य रूप से सृजन चटर्जी ने किया। नृत्य निर्देशन एवं कोरियोग्राफी असीमबंधु भट्टाचार्य की जबकि, परिकल्पना व प्रस्तुति सुरभि सिंह की रही। प्रकाश परिकल्पना व संचालन दिल्ली के बर्मन दा व एम.हफीज ने किया। रूपसज्जा सौमित्र सरकार कर रही प्रस्तुति नियंत्रक का दायित्व विकास मिश्र यह नृत्यनाटिका पिछले चार वर्षों से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व भर में प्रदर्शित कर रही है। कथक नृत्य में पहली बार इस तरह का प्रयोग हुआ है।


नृत्य नाटिका से पहले नृत्य निर्देशक असीम बंधु भट्टाचार्य ने कथक के नृत्त व भाव पक्ष को अपनी एकल प्रस्तुति में दर्शाया। उनका साथ हारमोनियम पर पं.धर्मनाथ मिश्र, तबले पर विकास मिश्र व बांसुरी पर दीपेन्द्र कुंवर ने दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्रीनारायण शुक्ल, विशिष्ट अतिथि नैमिष पीठाधीश्वर अनिलकुमार शास्त्री, पूर्व सांसद लालजी टण्डन व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक पाठक आमंत्रित थे।


उन्होंने बताया कि कल्चरल क्वेस्ट संस्था के माध्यम से वे इससे पहले मधुशाला, राम की शक्तिपूजा, कामायनी, बेग़म हज़रत महल, झांसी की रानी इत्यादि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित कई कथक संरचनाएं प्रस्तुत की हैं।

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