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कभी लगा था चोरी का इल्जाम, ‘आक्रोश’ ने बना दिया आम इंसान की आवाज

 Tahlka News |  2017-01-06 07:13:42.0

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तहलका न्यूज ब्यूरो

लखनऊ. कभी 70 के दशक में रूपहले परदे पर आम इंसान का चेहरा बनकर उभरने वाले ओम पुरी नहीं रहे. उनका जीवन हमेशा एक खुली किताब की तरह रहा. उनका जाना न केवल फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा नुकसान है बल्कि उस आम इंसान के लिए भी सदमा है, जिसकी आवाज वे अपने किरदारों के जरिए उठाते थे.

मशहूरी की बुलंदियों पर पहुँचने के लिए ओम पुरी ने बहुत संघर्ष किया था. यहां तक कि उन्होंने नाजुक माने जाने वाले बचपन में चोरी जैसा इल्जाम भी झेला था. अंबाला में जन्मे ओम पुरी का परिवार लगातार गरीबी से जूझता रहा. परिवार के भरण-पोषण में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए सात साल के ओम ने एक ढाबे पर बर्तन धोने का काम शुरू कर दिया था. लेकिन बदनसीबी ऐसी चिपकी कि एक दिन ढाबा-मालिक ने उनपर चोरी का इल्जाम लगा, नौकरी से निकाल दिया.

ओम पुरी, Om Puri, Bollywood, Aakrosh, Indian Cinem, Parallel Cinema, Character Roles, National School of Drama, Theatre ओम पुरी ने परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए रेलवे लाइन के किनारे कोयला बीनने का काम किया. इसी दौरान वे उस समय चलने वाले स्टीम इंजन को देख, लोको पायलट का सपना बुनने लगे थे. लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था. परिवार के बिगड़ते आर्थिक हालात के चलते उन्हें उनके ननिहाल भेज दिया गया.

पढाई के दौरान उनका रुझान नाटकों की तरफ हो गया और वे थिएटर ग्रुप से जुड़कर नाटकों ने हिस्सा लेने लगे.पढ़ाई और नाटकों का शौक पूरा करने के लिए उन्होंने इस दौरान एक वकील के यहां मुंशी का भी काम किया. बचपन में मुफिलिसी से लड़ते हुए बॉलीवुड में पैरेलल सिनेमा का बेताज बादशाह बनने में, ओम पुरी के संघर्ष का बहुत बड़ा हाथ रहा. ये उनके जीवन के संघर्ष का आक्रोश ही था, जो आम इंसान की आवाज बनकर रूपहले पर्दे पर नजर आता था.



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