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पंचायती राज के मजबूत होने से लोकतंत्र मजबूत होगा

 Sabahat Vijeta |  2016-06-16 16:07:19.0

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  • समाजवादियों की सदैव यह कोशिश रही है कि ज्यादा से ज्यादा अधिकार पंचायत प्रतिनिधियों को दिए जाएं: मुख्यमंत्री

  • प्रदेश के विकास और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी संचालन में पंचायतराज व्यवस्था के जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका

  • ब्लाॅक प्रमुख सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने में अत्यन्त प्रभावी हो सकते हैं

  • राज्य सरकार जनप्रतिनिधियों के सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगी

  • मुख्यमंत्री से उ.प्र. ब्लाॅक प्रमुख संघ के प्रतिनिधिमण्डल नेे मुलाकात की


लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि पंचायती राज के मजबूत होने से लोकतंत्र मजबूत होगा। इसके मद्देनजर राज्य सरकार ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाने का प्रयास लगातार कर रही है। समाजवादियों की सदैव यह कोशिश रही है कि ज्यादा से ज्यादा अधिकार पंचायत प्रतिनिधियों को दिए जाएं।


मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी सरकार के दौरान ही प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई थी तथा पंचायत गतिविधियों के लिए मानदेय और भत्तों की व्यवस्था की गई थी। वर्तमान सजावादी सरकार ने इसमें बढ़ोत्तरी की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह प्रयास रहेगा कि ब्लाक प्रमुखों के कद और गरिमा के अनुरूप उनको सम्मान मिल सके और उनके अधिकारों में वृद्धि की जा सके।


मुख्यमंत्री आज यहां अपने सरकारी आवास पर ब्लाॅक प्रमुख संघ के एक प्रतिनिधिमण्डल से भेंट कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, डाॅ. राम मनोहर लोहिया जैसे सभी बड़े चिन्तकों का यही मानना रहा है कि जब तक गांवों में खुशहाली नहीं आएगी, देश व प्रदेश खुशहाल नहीं हो सकता। इसके मद्देनजर गांवों की तरक्की में सहकारिता आन्दोलन, ग्राम्य विकास, जिला पंचायतों आदि की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन सबके मिलकर काम करने पर गांवों का अभूतपूर्व विकास किया जा सकता है।


श्री यादव ने अपने सरकारी आवास पर ब्लाॅक प्रमुखों का स्वागत करते हुए हाल ही सम्पन्न हुए पंचायत चुनावों में सफलता प्राप्त करने के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी संचालन में पंचायतीराज व्यवस्था के जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ब्लाॅक प्रमुख सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने में अत्यन्त प्रभावी हो सकते हैं, इससे जहां एक ओर विकास कार्यों में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी संचालन हो सकेगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंचायत जनप्रतिनिधियों के सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगी। इसके मद्देनजर लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व ही समाजवादी सरकार द्वारा ब्लाॅक प्रमुखों के मानदेय में 4,000 रुपए की बढ़ोत्तरी करते हुए उसे 7,000 रुपए प्रति माह किया जा चुका है। बैठक भत्ते में भी 300 रुपए की बढ़ोत्तरी करते हुए उसे 500 रुपए प्रति बैठक कर दिया गया है।


बैठक के दौरान संघ ने मुख्यमंत्री को अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए बताया कि क्षेत्र पंचायतों के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों में निरंतर कटौती होती जा रही है, जिसके कारण वे अपने को अधिकारविहीन महसूस कर रहे हैं और जनआकांक्षाओं की पूर्ति करने में सक्षम नहीं पा रहे हैं।


प्रतिनिधिमण्डल ने आठ सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत करते हुए चतुर्थ वित्त आयोग से ब्लाॅकों की धनराशि बढ़ाने, करारोपण के और अधिकार देने, ब्लाॅकस्तरीय विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के नियंत्रण एवं अनुश्रवण, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को क्षेत्र पंचायत का सचिव नामित करने, राशन की दुकानों का अनुमोदन प्रदान करने, अपना मानदेय बढ़ाए जाने, हैण्ड पम्प का कोटा दिए जाने तथा ब्लाॅक स्तर पर चिकित्सा विभाग, बाल विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग एवं कृषि विभाग आदि सभी विभागों के कार्यक्रमों के अनुश्रवण एवं निरीक्षण का अधिकार भी ब्लाॅक प्रमुख को दिए जाने की मांग की।


मुख्यमंत्री ने संघ की सभी मांगों को विस्तार से सुनते हुए आश्वासन देते हुए कहा कि चूंकि इस मांग पत्र में कई विभागों से सम्बन्धित मांगें हैं, अतः मुख्य सचिव सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर इन पर विचार कर अपनी संस्तुतियां देंगे।


मुलाकात के दौरान ब्लाॅक प्रमुख संघ के संयोजक सचिन अहलावत, संरक्षक राहुल देव, विमल शर्मा इत्यादि शामिल थे।

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