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ऐसे गिरफ्तार हुए दयाशंकर, ये है पूरा किस्सा

 Tahlka News |  2016-07-29 11:22:10.0

ऐसे गिरफ्तार हुए दयाशंकर, ये है पूरा किस्सा

तहलका न्यूज़ ब्यूरो 

लखनऊ . बीते एक सप्ताह से यूपी की सियासत में गर्मी बढ़ने वाले पूर्व भाजपा नेता दयाशंकर सिंह आखिरकार बक्सर में गिरफ्तार हो गए. दयाशंकर के गिरफ्तार होने के कुछ ही समय पहले तक उनके अदालत में सरेंडर करने की बाते हो रही थी मगर यूपी एसटीऍफ़ ने उन्हें दबोच लिया.

मायावती को अपशब्द कहने के बाद से सुर्ख़ियों में आने वाले दयाशंकर सिंह ने घटना के बाद माफ़ी तो मांगी मगर बसपा सुप्रीमो के कड़े तेवरों के बाद वे फरार हो गए थे. लखनऊ और मऊ में दर्ज हुए मुकदमो के बाद दयाशंकर  सिंह पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी थी. मायावती ने भी सरकार पर दवाव बढ़ा दिया था.


इस बीच दयाशंकर सिंह मऊ से बलिया पहुच गए. लखनऊ और बलिया के उनके घरो पर पुलिस की दबिश हुयी मगर वे नहीं मिले. मोबाईल के लोकेशन के आधार पर पुलिस उनके पीछे थी. 21 जुलाई की शाम को मोबाईल की लोकेशन गोरखपुर में मिली. सूत्रों के अनुसार वे गोरखपुर के एक कद्दावर सांसद की शरण में आ गए थे. 22 जुलाई को गोरखपुर में पीएम मोदी का कार्यक्रम था. इसके बाद दयाशंकर का मोबाईल स्विच आफ हो गया.

इधर यूपी की सियासत नया मोड़ लेने लगी थी , एक तरफ मायावती ने यूपी सरकार को निशाने पर लिया तो वहीँ दयाशंकर की पत्नी स्वाती के पक्ष में खड़े होने के बहाने भाजपा ने मोर्चा सम्हाल लिया. जातीय राजनीती भी गर्माने लगी और यह सवर्ण बनाम दलित का रंग लेने लगी. क्षत्रियो के कई संगठन स्वाति सिंह के पक्ष में खड़े होने लगे और दयाशंकर सिंह को भी इसी के साथ माईलेज मिलने लगा.

बीते कई दिनों से रह रह कर यह अफवाह भी उड़ती रही कि दयाशंकर गिरफ्तार कर लिए गए हैं मगर उन्हें पेश नहीं किया जा रहा. तभी दयाशंकर सिंह की झारखण्ड में देवघर मंदिर में होने की तस्वीर सोशल मीडिया पर आ गयी. इसके बाद यूपी एसटीऍफ़ ने सोशल मीडिया सर्विलांस का सहारा ले लिया. इस जरिये दयाशंकर सिंह के बक्सर में होने का संकेत मिला जिसके बाद एसटीऍफ़ ने अपने मुखबिरों के जरिये इसकी पुष्टि कर ली.

यूपी पुलिस ने निचली अदालत से दयाशंकर सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल कर लिया था मगर दयाशंकर के वकीलों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने भी इस याचिका को ख़ारिज कर दिया तब दयाशंकर के विकल्प ख़त्म हो गए . उसके बाद सहयोगियों ने दयाशंकर के सरेंडर की योजना पर काम करना शुरू कर दिया.

बलिया को अपना कर्मक्षेत्र बनाने वाले दयाशंकर के समर्थको के एक गुट का मानना था कि दयाशंकर को बलिया में सरेंडर करना चाहिए. उनके साथ 10 हजार की भीड़ भी हो तो राजनीतिक फायदा होगा और दयाशंकर हीरो बन जायेंगे मगर दुसरे गुट का जोर लखनऊ पर था जिसका मानना था कि लखनऊ में सरेंदाएर करने से उन्हें मीडिया का बहुत कवरेज भी मिलेगा और राजनीती का केंद्र होने के नाते प्रचार भी.

मगर इसी रणनीतिक निर्णय में देरी हो गयी और दयाशंकर बिहार पुलिस के सहयोग से यूपी एसटीऍफ़ के हत्थे चढ़ गए.

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