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कैराना पर घमासान, बोले अमर सिंह- कश्मीरी पंडितो को देखे भाजपा

 Tahlka News |  2016-06-12 09:39:59.0

New Delhi: Former Samajwadi Party leader Amar Singh arrives to address the media over controversial CD case, at his residence in New Delhi on Monday. PTI Photo by Kamal Singh(PTI4_18_2011_000122A)

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने मुजफ्फर नगर के कैराना से हिन्दुओं के पलायन का मुद्दा उठाकर राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है तो दूसरी तरफ लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए सपा सांसद अमर सिंह ने भाजपा को कश्मीरी पंडितो की याद दिला दी.

एक सवाल का जवाब देते हुए अमर सिंह ने कहा कि कैराना मामले की प्रशासनिक जांच हो रही है मगर भाजपा को अब कश्मीरी पंडितो का पलायन नज़र क्यों नहीं आ रहा ? जबकि केंद्र में उसकी सरकार है और राज्य सरकार में भी वह शामिल है.


अमर सिंह ने कहा कि कैराना में कथित रूप से मुस्लिमों से डरे सहमे हिन्दुओं के पलायन के मुद्दे को हवा देकर भाजपा अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढावा देने की कोशिश कर रही है.

सपा सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहम्मद आज़म खान ने हुकुम सिंह को ही कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि हुकुम सिंह 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी है वे कुछ भी ठंडे बस्ते से निकाल कर ले आते हैं और प्रयोगशाला से मनगढंत रिपोर्ट का इंतजाम कर लेते हैं.

कैराना को लेकर सपा प्रवक्ता सीपी राय ने कहा है कि BJP,RSS मामले को नया मोड़ देने की कोशिश कर रहे हैं. सीपी राय ने पलायन के सवाल पर कहा कि 'रोजगार,नौकरी के लिए पलायन कोई भी कर सकता है', BJP और RSS नफरत पर राजनीति ही करते हैं.

रिहाई मंच ने कहा झूठ है हुकुम सिंह की रिपोर्ट

जन संगठन रिहाई मंच ने कैराना मामले में हुकुम सिंह की रिपोर्ट को झूठ का पुलिंदा बताया है. रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में मंच के महासचिव राजीव यादव ने कहा कि मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा के आरोपी हुकुम सिंह ने जिन 21 हिंदुओं की हत्याओं की सूची जारी की है उनमें से एक भी सांप्रदायिक हिंसा या द्वेष के कारण नहीं मारे गए हैं और उनमें से कईयों की तो ढाई दशक पहले हत्याएं हुई थीं.

उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी द्वारा इस सूची की की गई तथ्यान्वेषण के आधार पर बताया कि इस सूची में दर्ज मदनलाल की हत्या 20 वर्ष पहले, सत्य प्रकाश जैन की 1991, जसवंत वर्मा की 20 साल पहले, श्रीचंद की 1991, सुबोध जैन की 2009, सुशील गर्ग की 2000, डा0 संजय गर्ग की 1998 में हत्याएं हुई थीं. इन सभी हत्याओं में आरोपी भी हिंदू समाज से थे.

रिहाई मंच महासचिव ने कहा कि रिहाई मंच कार्यालय सचिव ने जब इस बाबत सीओ कैराना भूषण वर्मा से बात की तो उन्होंने भी भाजपा सांसद द्वारा जारी सूची को फर्जी और तोड़ा-मरोड़ा बताया. उन्होंने कहा कि थाना कैराना में पिछले डेढ़ साल में कोई भी सांप्रदायिक कारणों से हत्या नहीं हुई है और जो घटनाएं हुई भी हैं वो विशुद्ध आपराधिक प्रवृत्ति की रही हैं.

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